अचानक ही तीनों की हालत बिगड़ गई
शुक्रवार को पूरे दिन तीनों कोतवाली के मुंशियाने में ही गुमसुम बैठे रहे। दोपहर 3:30 बजे चार-पांच सिपाही तीनों को कोर्ट ले जाने से पहले उर्सला में मेडिकल के लिए लेकर पहुंचे तो डॉ. प्रवीण अपने दिल पर हाथ रखकर कुर्सी पर बैठ गया। इधर, डॉ. महेश भी फर्श पर बैठ गया और बताया कि सर्वाइकल के चलते उसे चक्कर आ रहे हैं। दोनों को देखते ही अजीत भी चिल्ला उठा कि पिटाई से उसके सिर में गहरी चोटें आई हैं। वह भी पास में पड़े बेड पर लेट गया। अचानक ही तीनों की हालत बिगड़ गई।
वसूली का आरोपी डॉक्टर प्रवीण सक्सेना
- फोटो : amar ujala
पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी संदेह
उन्हें वार्ड से आईसीयू में ले जाया गया। सूत्राें के अनुसार डॉक्टरों के अचानक भर्ती होने के पीछे कोतवाली के पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी संदेह है। आशंका जताई जा रही है कि किसी पुलिसकर्मी ने ही जेल जाने से बचने का रास्ता उन्हें दिखाया होगा। वहीं, पुलिस कमिश्नर भी नहीं बता पाए कि जेल जाने वाले डॉक्टर अचानक आईसीयू कैसे पहुंच गए। मामले में एसीपी कोतवाली अमित कुमार पांडे का कहना है तीनों आईसीयू में रहेंगे। पुलिस की मिलीभगत की बात पर जांच कराने की बात कही।
डॉ. प्रवीण पहले भी रहा है आरोपों के घेरे में
पुलिस लाइन रिश्वत प्रकरण में घिरे उर्सला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. प्रवीन सक्सेना और डॉ. महेश द्विवेदी पर रुपये लेने का आरोप पहली बार नहीं लगा है। इससे पहले भी कई तीमारदार रुपये लेकर सर्जरी करने और इलाज में लापरवाही की शिकायतें कर चुके हैं। हालांकि, मामला अंदरूनी होने के चलते कभी कार्रवाई नहीं की गई।
वसूली का आरोपी डॉक्टर महेश द्विवेदी
- फोटो : amar ujala
मेडिकोलीगल के नाम पर लिए 32 हजार रुपये
कर्मचारियों के अनुसार उर्सला में बुधवार को एक मामला मेडिकोलीगल से जुड़ा आया। इसमें डॉ. प्रवीण ने मेडिकोलीगल करने के 32 हजार रुपये ऑनलाइन ले लिए। जिसका मेडिकोलीगल होना था वो बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा सोनकर का खास था। रुपये लेने की बात पता चलते ही राहुल बच्चा सोनकर खुद अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर को रुपये वापस करने की बात कही। इस पर डॉ. प्रवीण ने रुपये लेने से इन्कार कर दिया। पैसे ऑनलाइन लिए गए थे इसलिए सुबूत था जिसे लेकर आरोप है कि डॉक्टर प्रवीण की कुछ लोगों ने कलाई मरोड़ दी। इसके बाद डॉ. प्रवीण ने वो पैसे विधायक को वापस किए। हालांकि, मामले में विधायक राहुल बच्चा सोनकर ने इन्कार किया है।
दरोगा भर्ती में भी बन गए थे दो बोर्ड
फरवरी में हुई दरोगा भर्ती परीक्षा में फिटनेस के लिए एडी हेल्थ की ओर से एक बोर्ड बनाया जाता है। इसके बावजूद आरोप है कि डॉ. प्रवीण ने अपने लिंक निकालकर एक और बोर्ड उर्सला अस्पताल का अपना बनवा लिया। हालांकि, तुरंत ही बोर्ड भंग करने के निर्देश दिए गए।
ऑपरेशन के नाम पर तीमारदारों से वसूली के पुराने किस्से
उर्सला अस्पताल में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों और उनके तीमारदारों का आरोप है कि डॉ. प्रवीण पर आए दिन सर्जरी के नाम पर अवैध रूप से पैसे मांगने के आरोप लगते रहे हैं। इसका एक पुख्ता उदाहरण साल 2024 का है जब एक मरीज ने लिखित रूप से अस्पताल के निदेशक से शिकायत की थी। आरोप था कि डॉक्टर ने सर्जरी के एवज में पैसों की मांग की। डॉक्टर के ड्राइवर के हाथों रुपये लेने की शिकायत भी की थी। इसके बाद भी डॉक्टर के खिलाफ कोई ठोस विभागीय या कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इसी के चलते उसका दुस्साहस बढ़ता गया।
दिव्यांग बोर्ड से हटाए जाने का मामला और ओटी में मनमानी
रिश्वत और वसूली के इन आरोपों के बीच डॉ. प्रवीण का एक और कारनामा सामने आया है। वह उर्सला अस्पताल के दिव्यांग बोर्ड में ईएनटी विशेषज्ञ के रूप में नामित था। नियम और जिम्मेदारी के अनुसार उसे बोर्ड में बैठकर दिव्यांगों के प्रमाणपत्र व अन्य मामलों का निस्तारण करना था लेकिन वो बोर्ड में बैठने के बजाय अपना 80 प्रतिशत समय ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में गुजारता था। आरोप है कि सर्जरी के नाम पर वो हर रोगी से 10 से 15 हजार रुपये लेता था। इसलिए उसका ज्यादातर समय ओटी में बिताता क्योंकि इसमें फायदा होता था। जब इस बात की आधिकारिक शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास पहुंची तो प्रशासन हरकत में आया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने इस अनियमितता का संज्ञान लेते हुए डॉ. प्रवीण सक्सेना को जुलाई 2026 में दिव्यांग बोर्ड से हटा दिया।