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कानपुर: 10 बीघे का ऐतिहासिक तालाब जलकुंभी से तबाह, दुर्गंध और बीमारियों से घिरी आबादी, एसडीएम को सौंपा पत्र

Wed, 26 Aug 2026 09:47 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: नरवल तहसील के सरसौल ब्लॉक स्थित ग्राम पुरवामीर में लगभग 10 बीघे का ऐतिहासिक तालाब पिछले तीन-चार वर्षों से भीषण जलकुंभी और गंदगी के कारण बदहाल हो चुका है। इससे उत्पन्न संक्रामक बीमारियों और हादसों के डर के साये में करीब 5000 की आबादी जीने को मजबूर है। 
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पुरवामीर गांव में बदहाली का शिकार ऐतिहासिक तालाब - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में नरवल तहसील के विकासखंड सरसौल के ग्राम पुरवामीर में बस्ती के बीचों-बीच स्थित करीब 10 बीघे का बड़ा तालाब कभी गांव की सुंदरता का प्रतीक था। इसी तालाब में गांव के लोग नहाते-धोते थे, मवेशी पानी पीते थे और साफ-सफाई बनी रहती थी।

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पक्का घाट और किनारे बने मंदिर इसकी शोभा बढ़ाते थे, लेकिन पिछले तीन से चार वर्षों से तालाब में फैली भीषण जलकुंभी ने इसे अभिशाप बना दिया है। ग्रामीणों के अनुसार जलकुंभी में फंसकर कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। बच्चे तालाब के पास जाने से डरते हैं।





भीषण दुर्गंध और गंदगी फैल रही

अभिभावक उन्हें घरों से बाहर नहीं निकलने देते। जलकुंभी के कारण लोग तालाब में कूड़ा-कचरा फेंकने लगे हैं, जिसके सड़ने से भीषण दुर्गंध और गंदगी फैल रही है। आसपास के घरों में लोग संक्रामक बीमारियों से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने एसडीएम नरवल को शिकायती पत्र सौंपा है।

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पुरवामीर गांव में बदहाली का शिकार ऐतिहासिक तालाब - फोटो : amar ujala

5,000 की आबादी को मिलेगी बड़ी राहत
उनकी मांग है कि तालाब का जीर्णोद्धार कराया जाए। जलकुंभी को पूरी तरह साफ कर पांच साल पुरानी स्थिति में लौटाया जाए। यदि तालाब साफ हो जाए, तो 5,000 की आबादी को बड़ी राहत मिलेगी और गांव की पहचान फिर से लौट आएगी।

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