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Kanpur: संक्रमण खत्म पर रिपोर्ट पॉजिटिव, डायलिसिस में भी दिक्कत…नहीं जा पा रहे विदेश, डॉक्टरों ने कही ये बात

Thu, 23 Oct 2025 04:13 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: हेपेटाइटिस सी से ठीक हो चुके लोगों की एंटीबॉडीज पॉजिटिव रिपोर्ट खाड़ी देशों में नौकरी और हज यात्रा में बाधा बन रही है। डॉक्टर के अनुसार यह एंटीबॉडीज जीवन भर रहती है, लेकिन विदेशों में आरएनए नेगेटिव रिपोर्ट को मान्यता नहीं मिल रही है।
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हैलट हॉस्पिटल कानपुर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में हेपेटाइटिस सी रोग लाइलाज नहीं रहा, फिर भी इसकी चपेट में आए लोगों से विदेश में नौकरी का मौका छिन रहा है। हेपेटाइटिस सी संक्रमण निगेटिव हो जाने के बाद भी जांच कराने पर रिपोर्ट एंटीबॉडीज पॉजिटिव आती है। इस आधार पर लोगों की नौकरी का मौका चला जाता है। घबराए लोग फिर इलाज के लिए अस्पताल का चक्कर काटने लगते हैं। सबसे अधिक खाड़ी देशों में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले मौका खो रहे हैं।

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हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में हेपेटाइटिस सी एंटीबॉडीज पॉजिटिव छह-सात लोग हर महीने आते हैं।  ये इलाज के बाद ठीक हो गए, फिर भी एंटीबॉडीज रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इससे नौकरी का अवसर चला गया। साथ ही, इस तरह की रिपोर्ट वाले लोग हज यात्रा और उमरा पर भी नहीं जा पा रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनका आवेदन निरस्त हो रहा है।

आरएनए जांच में हेपेटाइटिस सी वायरस निगेटिव आता है
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार का कहना है कि संक्रमण ठीक होने के बाद भी रोगी के शरीर में एंटीबॉडीज जीवन भर रहेंगी। आरएनए जांच में हेपेटाइटिस सी वायरस निगेटिव आता है। इस रिपोर्ट के आधार पर व्यक्ति को लिखकर दे दिया जाता है कि व्यक्ति में अब संक्रमण नहीं है। पॉजिटिव रिपोर्ट आने का कारण शरीर में एंटीबॉडीज बनी है। फिर भी विदेश में डॉक्टरों के इस सर्टिफिकेट को मान्यता नहीं दे रहे। खासतौर पर खाड़ी देशों में नौकरी के लिए जाने वालों को यह दिक्कत अधिक हो रही है।

117 हेपेटाइटिस सी के रोगी ठीक हुए
वे आरएनए जांच के बजाए एंटीबॉडीज की रिपोर्ट देखते हैं। हज यात्रा पर जाने वालों के लिए भी यह दिक्कत आ रही है। इसके लिए आरएनए जांच को मान्य करना चाहिए। संक्रमितों की अच्छी खासी संख्या है। विभाग में नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस सी के 95 से 98 प्रतिशत रोगी इलाज से ठीक हो जाते हैं। एक साल में 117 हेपेटाइटिस सी के रोगी ठीक हुए हैं। इसके साथ ही विभाग में 90 रोगियों का अभी इलाज चल रहा है।
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डायलिसिस में भी दिक्कत
हेपेटाइटिस सी संक्रमण से मुक्त हो हो चुके गुर्दा रोगियों को डायलिसिस में भी दिक्कत आ रही है। डॉ. विनय कुमार ने बताया कि जब डायलिसिस के पहले हेपेटाइटिस सी की जांच कराई जाती है तो एंटीबॉडीज रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। इस पर निजी अस्पताल वाले डायलिसिस नहीं करते। उस गुर्दा रोगी को हेपेटाइटिस सी रोगियों वाली मशीन पर डायलिसिस के लिए भेजा जाता है। ऐसे में संक्रमणमुक्त हो चुके रोगी को दोबारा हेपेटाइटिस संक्रमण होने का खतरा रहता है।
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