हृदय की पंपिंग क्षमता भी सामान्य रही
उन्होंने बताया कि कार्डियोलॉजी में भी 350 रोगियों पर शोध किया गया। इनमें 175 महिला और 175 पुरुष रोगी रहे हैं। इनका आयु वर्ग 45 से 75 वर्ष के बीच था। यह समस्या मोटापा ग्रस्त, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों में अधिक रही हैं। हृदय की ईसीजी, इको आदि जांचें सामान्य आईं। हृदय की पंपिंग क्षमता भी सामान्य रही है। इसके बाद भी रोगियों के पैरों में सूजन, थकान आना, सांस फूलना आदि लक्षण रहे हैं। बाद में जांच करने पर इनके शिथिलन में कमी पाई गई। हार्ट फेल के इस नए कारण पर हाल में लखनऊ में हुई कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी आफ इंडिया की कॉंफ्रेंस में भी मंथन किया गया।
खून में बढ़ने लगता है बीएनपी
इसके लिए गाइडलाइन तैयार की गई। इसमें कहा गया कि अगर रोगी में इस तरह के लक्षण हैं और रूटीन जांचें सामान्य आ रही हैं तो शिथिलन संबंधी जांच कराई जाएं। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में आए रोगियों पर अध्ययन एक साल के अरसे में किया गया। कमजोर शिथिलन वाले रोगियों में पंपिंग से सारा खून शरीर में नहीं जाता। कुछ हृदय में रुका रहता है। इसके लक्षण पैरों में सूजन, सांस फूलने से आते हैं। इस पर बीएनपी टेस्ट कराया जाता है। यह बायो केमिकल पैरामीटर है। जब शिथिलन की दिक्कत होती है, तो खून में बीएनपी बढ़ने लगता है।