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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा पशुओं को लेकर सख्त निर्देश दे चुका है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अस्पताल, स्कूल और संवेदनशील संस्थानों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट के निर्देशानुसार, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसे स्थानों को सुरक्षित रखा जाए और आवारा पशुओं की आवाजाही रोकी जाए।