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Hair Transplant: शुगर निकली थी 450…पैथोलॉजी कर्मी ने ट्रांसप्लांट से रोका था, पुलिस ने दर्ज किए बयान, खोले राज

Mon, 26 May 2025 11:42 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: विनीत दुबे के इलाज की इस संक्षिप्त रिपोर्ट डायग्नोसिस सेप्टिक और एनाफिलैक्टिक शॉक बताया गया है। विनीत को काकादेव स्थित एक निजी अस्पताल से सर्वोदयनगर के अस्पताल रेफर किया गया था। उन्हें सांस में दिक्कत थी और शरीर में ऑक्सीजन लेवल घट रहा था।
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डॉ. अनुष्का तिवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर शहर के एक चर्चित पैथलॉजी के कर्मचारी ने डॉक्टर अनुष्का तिवारी के राज खोले हैं। कर्मचारी डॉ. अनुष्का के लिए भी काम करता था। उसने ही 14 मार्च को हेयर ट्रांसप्लांट से पहले मृतक इंजीनियर विनीत दुबे का सैंपल लिया था। जांच में 450 शुगर निकलने की डॉक्टर को जानकारी देने के बाद उसने ट्रांसप्लांट न करने का सुझाव भी दिया था। हालांकि डॉक्टर नहीं मानी। 

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कर्मचारी के मुताबिक दर्द होने पर विनीत को इंजेक्शन लगा दिया गया। जब सूजन बढ़ी और हालत बिगड़ी तो उसे कल्याणपुर के एक निजी अस्पताल में लेकर गए। मृतक विनीत की पत्नी से कर्मचारी ने सारी बात बताई है। पुलिस ने भी कर्मचारी के बयान दर्ज किए हैं। बताया कि डॉ. अनुष्का पति के साथ गाड़ी से विनीत को लेकर कल्याणपुर स्थित अस्पताल पहुंची।

विनीत को निजी अस्पताल में कराया था भर्ती
वहां भर्ती करने से मना कर दिया गया तो वह कल्याणपुर स्थित दूसरे अस्पताल में ले गईं। तीन बजे तक डॉक्टर दंपति विनीत को लेकर घूमते रहे। इसके बाद छपेड़ा पुलिया के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बता दें, जब फर्रुखाबाद निवासी मयंक कटियार की भी तबीयत बिगड़ी थी, तो उन्हें भी इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इसी क्लिनिक पर हुआ हेयर ट्रांसप्लांट - फोटो : संवाद
बेहोशी की हालत में विनीत पहुंचे थे निजी अस्पताल
हेयर ट्रांसप्लांट कराने के बाद बेहोशी और शॉक की हालत में इंजीनियर विनीत दुबे सर्वोदयनगर स्थित अस्पताल पहुंचे थे। एनाफिलैक्टिक शॉक से इंजीनियर विनीत दुबे की हालत गंभीर हो गई। यह ऐसी जानलेवा एलर्जी प्रक्रिया को कहते हैं, जो किसी केमिकल की वजह से होती है। अस्पताल ने जांच कमेटी को इलाज का जो संक्षिप्त ब्योरा दिया है, उसमें बताया गया है कि रोगी का ब्लड प्रेशर गिरता गया।

सांस में दिक्कत थी, ऑक्सीजन लेवल घट रहा था
हालत इतनी गंभीर रही है कि इलाज की सारी प्रक्रिया अपनाने के बाद संभल नहीं सकी और बाद में मौत हो गई। विनीत दुबे के इलाज की इस संक्षिप्त रिपोर्ट डायग्नोसिस सेप्टिक और एनाफिलैक्टिक शॉक बताया गया है। विनीत को काकादेव स्थित एक निजी अस्पताल से सर्वोदयनगर के अस्पताल रेफर किया गया था। उन्हें सांस में दिक्कत थी और शरीर में ऑक्सीजन लेवल घट रहा था।

हेयर ट्रांसप्लांट के बाद चेहरे पर आई थी सूजन - फोटो : अमर उजाला
सीपीआर दिया गया, लेकिन स्थिति नहीं संभल पाई
शरीर मल्टी आर्गन फेल्योर की स्थिति में रहा है। जब उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया तो हार्ट रेट 136 रहा है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर गिर रहा था। बाद में कार्डिएक अरेस्ट हो गया। आधा घंटे से अधिक उन्हें सीपीआर दिया गया, लेकिन स्थिति नहीं संभल पाई। संक्षिप्त रिपोर्ट में अस्पताल ने उनकी रक्त और दूसरी जांचों की रिपोर्ट के साथ पूरे इलाज का ब्योरा भी दिया।
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एलर्जिक रिएक्शन से बचाव का इलाज मिल जाएगा
एलर्जिक रिएक्शन के संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि यह जानलेवा होता है। हेयर ट्रांसप्लांट करते वक्त व्यक्ति को दवाएं दी जाती हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेम शंकर और त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. डीपी शिवहरे का कहना है कि उसी अस्पताल में हेयर ट्रांसप्लांट होना चाहिए जहां आईसीयू की सुविधा हो। इसके साथ ही जिसके हेयर ट्रांसप्लांट किया जा रहा है, उसके एलर्जी टेस्ट भी कराए जाने चाहिए। आईसीयू होने से व्यक्ति को तुरंत एलर्जिक रिएक्शन से बचाव का इलाज मिल जाएगा।
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