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घर में पत्नी की कब्र बना उसी पर सोता था जाकिर, पिशाची प्रवृत्ति का मान सुनाई थी फांसी, अब हुआ बरी

Sun, 19 May 2019 11:54 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
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कानपुर में सास और दो सालों की हत्या के मामले में 17 जुलाई 2018 को अपर जिला जज अजय कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने जाकिर उर्फ राशिद को फांसी और शकीला को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने जाकिर को पिशाची प्रवृत्ति का अपराधी मानते हुए कहा था कि इसे समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं, मृत्युदंड ही इसके लिए उचित सजा है।
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राशिद की पत्नी शकीला को भी परिवार की हत्या में बराबर से शामिल माना था लेकिन महिला होने और उसका प्रथम अपराध होने का लाभ देते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने अब दोनों को बरी कर दिया है।

मुकदमे में सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी ने सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए 13 गवाह कोर्ट में पेश किए थे। इसमें चश्मदीद मासूम सद्दाम की गवाही मुख्य थी। 5 मार्च 2013 की रात को हुई घटना की रिपोर्ट कारखाने के मैनेजर आनंद प्रकाश ने ग्वालटोली थाने में दर्ज कराई थी। 8 मार्च को झकरकटी बस स्टेशन से राशिद और शकीला को गिरफ्तार किया गया था।
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पत्नी की हत्या में हुई थी सजा
बहराइच के ग्राम रसूलपुर के रहने वाले जाकिर पर अपनी पहली पत्नी कनीमुन की 1997 में हत्या करने का भी आरोप था। बहराइच के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने 16 सितंबर 1999 में जाकिर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जेल में बंद जाकिर की अपील पर हाईकोर्ट ने उसे मार्च 2013 में 15 दिन के लिए गृह अवकाश पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया था। इस बीच पूर्व नियोजित योजना के तहत जाकिर जेल से छूटते ही बहराइच के थाना कैसरगंज के गोडिया गांव की रहने वाली शकीला को साथ भगाकर कानपुर लाया और निकाह कर लिया।

नाम बदलकर रह रहा था जाकिर 
कानपुर आकर जाकिर ने अपना नाम बदलकर राशिद रख लिया था। यहां हर कोई उसे राशिद के नाम से जानता था। वह ग्वालटोली में रहता था। शकीला की मां जैनब, बेटा इब्राहिम, हयाज और सद्दाम शकीला को ढूंढते-ढूंढते ग्वालटोली स्थित कारखाने पहुंचे थे जहां अगले दिन तीन लोगों की लाश मिली थी और राशिद व शकीला मौके से फरार थे। इस जघन्य हत्याकाण्ड में बचा एकमात्र मासूम सद्दाम घटना के समय तीन वर्ष का था। 6 साल की उम्र में उसने कोर्ट में गवाही देकर राशिद और शकीला को हत्या के लिए दोषी बताया था।
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घर में पत्नी की कब्र बना उसी पर सोता था 
जाकिर ने 1997 में बहराइच में अपनी पहली पत्नी कनीमुन की हत्या कर उसका शव घर पर ही दफन कर दिया था। वह उसी की कब्र पर चारपाई डालकर सोता था। हत्याकांड का खुलासा होने पर पुलिस ने कब्र की खुदाई भी करवाई थी जिसकेबाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

अचानक भड़क गया था
जब वह ग्वालटोली में रह रहा था तो उसकी सास अपने तीनों बेटों के साथ आई थी। सास जैनब ने उससे मामले में बातचीत कर वापस घर चलने की बात कही थी तो वह भड़क गया था। जैनब ने कनीमुन हत्याकांड के बारे में भी कुछ बातें कहीं थीं तो वह खुद पर काबू नहीं पा पाया था जिसके बाद पूरा खूनी खेल हुआ था।

सद्दाम को रजाई में छिपाया था
जब हत्याकांड को अंजाम दिया जा रहा था तो शकीला ने अपने भाई सद्दाम को रजाई में छिपा दिया था जिससे उसकी जान बच गई थी। पुलिस ने मामले का मुख्य गवाह बनाया था।
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