मौजूदा समय में सोने के भाव खासे तेज
हर सोने के गहने पर हॉलमार्क चिह्न के साथ ही एचयूआईडी, सराफा का कोड, कैरेट अंकित किया जाता है। ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने बताया कि अब नौ कैरेट की ज्वैलरी पर हॉलमार्क की मंजूरी भारतीय मानक ब्यूरो ने दे दी है। इस श्रेणी की मांग महाराष्ट्र और मुंबई के कारोबारी कर रहे थे। मौजूदा समय में सोने के भाव खासे तेज हैं। ऐसे में इस श्रेणी के गहनों की मांग बढ़ सकती है। कानपुर में 18 कैरेट की ज्वैलरी 60 प्रतिशत बिकती है। जबकि 20-22 कैरेट की हिस्सेदारी 30-35 प्रतिशत होती है।
इतनी होती है शुद्धता
14 कैरेट में 58 प्रतिशत, 18 कैरेट में 75 प्रतिशत, 20 कैरेट में 83 प्रतिशत, 22 कैरेट में 91 प्रतिशत, 23 कैरेट में 95 प्रतिशत और 24 कैरेट में 99.90 प्रतिशत सोने की शुद्धता होती है। चांदी के गहनों पर अभी हॉलमार्क नहीं लागू है।
नौ कैरेट की ज्वैलरी का हुआ था विरोध
नौ कैरेट की ज्वैलरी का सराफा ने पहले विरोध किया था। उनका तर्क था कि नौ कैरेट सोने में केवल 37.5 प्रतिशत सोना होता है, जबकि बाकी 62.5 अन्य धातुएं होती हैं। यह अधिक कठोर होता है, जो गहनों को अधिक टिकाऊ बना सकता है लेकिन इसका नुकसान भी है। कठोर सोना शरीर को खरोंच सकता है। शहर में नयागंज, बिरहाना रोड, चौक में सात हॉलमार्क सेंटर हैं। जहां पर 236 रुपये प्रति आर्टिकल देकर सोने के गहनों की शुद्धता जांची जा सकती है।
नौ कैरेट की ज्वैलरी पर भी हॉलमार्क मंजूर होना अच्छी पहल है। नई व्यवस्था सकारात्मक होती है। मौजूदा समय में सोने के भाव तेज हैं। अब सात श्रेणी की ज्वैलरी ग्राहक खरीद सकेंगे। -महेश चंद्र जैन, अध्यक्ष, उप्र सराफा एसोसिएशन
सोना-चांदी में लगातार महंगाई बढ़ती जा रहा है। एक और कैरेट श्रेणी बढ़ने से सराफा बाजार में बढ़त देखने को मिल सकेगी। युवाओं में इसकी ज्यादा मांग दिख सकती है। -रामकिशोर मिश्रा, मंत्री, उप्र सराफा एसोसिएशन