बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है
डॉ. श्वेतांक ने बताया कि महिला को एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) सेंटर भेजा गया। हालांकि वहां से परिवार प्राइवेट केंद्र चला गया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है और रोगी को जीवन भर बेहद सतर्कता के साथ दवाएं लेनी पड़ती हैं।
एचआईवी ही नहीं कई अन्य त्वचा रोग भी हो रहे
टैटू के शौकीनों को आगाह करते हुए डॉक्टरों ने बताया कि टैटू से सिर्फ एचआईवी ही नहीं बल्कि कई अन्य त्वचा रोग भी हो रहे हैं। टैटू में इस्तेमाल होने वाली लाल और हरे रंग की स्याही के कारण कुछ लोगों को एलर्जी का खतरा होता है। इसके चलते त्वचा पर दर्दनाक व खुजलीदार चकत्ते उभर आते हैं।
छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है
उन्होंने कहा कि हमेशा किसी अच्छी, साफ-सुथरी और प्रमाणित जगह से ही टैटू बनवाएं। टैटू आर्टिस्ट पर दबाव बनाएं कि वे आपके सामने ही सील पैक से नई और कीटाणुरहित सुई निकालें। टैटू बनवाने से पहले इस्तेमाल होने वाले रंगों और औजारों की स्वच्छता को लेकर पूरी तसल्ली कर लें। आपकी छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।