अमन सिंह के गिरोह में शामिल विभा सचान और अजय पटेल ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। जब पीड़ित पक्ष ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उन्हें धमकाया। इस घटनाक्रम के चलते सदमे में आकर रघुवीर सिंह की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह कोई पहला मामला नहीं था। बीते साल फरवरी में भी कई लोगों—राजीव सचान, जयपाल यादव, सुनील सिंह, योगेश सचान, ओपी यादव, सुधीर यादव, सुदेश चंद्र और प्रशांत मिश्रा—ने विभा सचान, उसके पति बाबू सचान और अजय पटेल समेत अन्य के खिलाफ फर्जी रजिस्ट्री के जरिए ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन विभा सचान लगातार फरार चल रही थी। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। थाना प्रभारी के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने रामगोपाल चौराहा से आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य संभावित नेटवर्क और ठगी के मामलों की जांच में जुटी है।