फर्जी रसीद लगाकर दिखा दिया भुगतान
प्रधान और सचिव बिना किसी काम के 1.60 लाख रुपये डकार गए। घाटमपुर ब्लाॅक में 11.67 लाख रुपये का घोटाला चारे के नाम पर किया गया। धर्मकांटा की फर्जी रसीद लगाकर मेसर्स श्री सिंह ट्रेडिंग कंपनी को 4.90 लाख रुपये का भुगतान दिखा दिया । टिकवापुर की गोशाला में 3.36 लाख और सजेती में 80 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया।
शासन ने सीडीओ से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी
ऑडिट टीम ने गोशालाओं की जांच कर सितंबर 2022 में रिपोर्ट तत्कालीन डीडीओ और तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आरपी मिश्रा को सौंपी थी। तत्कालीन सीडीओ महेंद्र कुमार ने जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन सचिवों और प्रधानों की मिलीभगत से अफसर जांच दबाकर बैठ गए। ऑडिट विभाग ने मामले की जानकारी शासन को दी। शासन ने सीडीओ से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है, जिस पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने संबंधित सचिवों को पत्र लिखकर जवाब-तलब किया है।
स्कूटी पर एक बार में लाद दिया 121 क्विंटल भूसा
ऑडिट टीम की जांच में स्कूटी पर 121 क्विंटल भूसा एक बार में लादकर सरसौल के रामपुर की गोशाला में पहुंचा दिया गया। इसमें करीब 69,945 रुपये रुपये खर्च होना भी बताया। धर्मकांटा में भूसा तौल कराने की कंप्यूटराइज्ड रसीदें भी लगाई थीं। ऑडिट टीम ने बिल में दर्ज नंबर को जब परिवहन विभाग के एप पर चेक किया तो ये नंबर स्कूटी का निकला।
धर्मकांटा से 10 माह बाद पहुंचा गोशाला भूसा
ऑडिट टीम ने घाटमपुर की कटरी ग्राम पंचायत में भी गोशाला तक भूसा पहुंचाने का फर्जी बिल पकड़ा। गोशाला में भूसा पहुंचने और धर्मकांटा पर तौले की तारीख में करीब 10 माह का अंतर था। रिपोर्ट के अनुसार, ओम धर्मकांटा हिलौली रोड उन्नाव की रसीद में सात नवंबर 2019 को भूसा तौला गया था, जबकि गोशाला के स्टॉक रजिस्टर में 14 सितंबर 2020 को आया दिखाया गया था।
इन पंचायतों की गोशाला में हुआ फर्जीवाड़ा
कठारा, सजेती, महिपालपुर, बौसर सरसौल, गागूपुर बिल्हौर, पतारा, कटरी घाटमपुर, बेहटा गंभीरपुर, गढ़ी बिहारीपुर, खेरसा बिधनू, पलिया बुजुर्ग, सुघरदेवा, शिवराजपुर, बिल्हौर, मोहिद्दीनपुर, टिकवा और निवादा उधौ में चारा घोटाला सामने आया था।
इसी तरह बिहार में 900 करोड़ का हुआ था चारा घोटाला
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के शासन में करीब 900 करोड़ रुपये का चारा घोटाला हुआ था। पशुपालन विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से पशुओं के चारे, दवाओं के फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपये गबन कर लिए गए थे। ये लंबे समय से खेल चल रहा था। इसी तरह कानपुर जिले में सचिवों ने ठेकेदारों की मिलीभगत से फर्जी बिल लगाकर सरकारी धन का गबन कर लिया।
ऑडिट टीम की तरफ से जो रिपोर्ट दी गई है, उसके आधार पर सचिवों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में बिल मांगे गए हैं। जो सही बिल उपलब्ध करा देंगे, उनको छोड़ दिया जाएगा। घाेटाला करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -आईडीएन चतुर्वेदी, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी