पुलिस ने मूलगंज, फीलखाना, बाबूपुरवा, रावतपुर, कल्याणपुर, किदवईनगर में पतंग दुकानों में चेकिंग अभियान चलाया। चाइनीज मांझे के खिलाफ मुख्यमंत्री का आदेश जारी होते ही थानेदार सतर्क हुए।
पतंग की प्रतिबंधित जानलेवा डोर को अब पकड़ने पर जोर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चाइनीज मांझे के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी होते ही गुरुवार को कमिश्नरी पुलिस सतर्क हो गई। मूलगंज, फीलखाना, बाबूपुरवा, रावतपुर, कल्याणपुर, किदवईनगर समेत अन्य क्षेत्रों की पतंग दुकानों में चेकिंग अभियान चला। दुकानदारों को चाइनीज मांझे की बिक्री न करने की सख्त हिदायत दी गई। उन्हें बताया गया कि अगर इसकी बिक्री होते पाई गई तो एनवायरमेंटल पॉल्युशन कंट्रोल एक्ट और बीएनएस की धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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लखनऊ में बुधवार को एक युवक की चाइनीज मांझे से मौत हो गई थी। प्रदेश में पूर्व में भी इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं। घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने इससे होने वाली मौत को हत्या की श्रेणी में रखने का निर्देश जारी किया। गुरुवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने थानेदारों और चौकी प्रभारियों को चाइनीज मांझे पर कार्रवाई का निर्देश दे दिया। पुलिसकर्मियों ने करीब चार घंटे अभियान चलाकर पतंग बाजार, जनरल स्टोर, धागा दुकानों पर जांच की। पुलिसकर्मियों ने सीढि़यों के सहारे टॉल पर चढ़कर भी चाइनीज मांझे चेक किए। दुकानदारों को इसकी बिक्री न करने को लेकर हिदायत दी।
पतंग दुकानों में चाइनीज मांझे की जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व में हो चुके हादसे 16 जनवरी 2026 : चाइनीज मांझे की वजह से किदवईनगर निवासी सत्यम सिंह के चेहरे पर घाव हो गया था। वह शाम को बाइक से जूही गौशाल रोड से घर लौट रहा था। किदवईनगर थाने के बाद पेड़ से चाइनीज मांझा लटका हुआ था, जिसकी चपेट में आकर उसकी आंख व नाक के पास चोटें आ गईं।
22 अप्रैल 2024 : प्रतिबंधित मांझे से फंसकर बर्रा निवासी गुड्डू वर्मा की गर्दन लहूलुहान हो गई थी। उन्हें गंभीर हालत में हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने आनन फानन सर्जरी कर उनकी जान बचाई थी। 05 मई 2021 : रावतपुर निवासी सुमित रेलबाजार क्षेत्र से गुजर रहे थे। अचानक किसी तार में उलझे चाइनीज मांझे से उनकी गर्दन में गहरा निशान बन गया। उन्हें उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से निजी अस्पताल में इलाज हुआ।
21 अक्तूबर 2017 : नई सड़क निवासी सुहेल ग्वालटोली से बाइक से लौट रहे थे। रास्ते में उनकी बाइक के आगे अचानक मांझा आ गया। वह जब तक रोकते उनकी थ्योड़ी के पास गहरा निशान बन गया। उनका प्राथमिक उपचार कराया गया।
पतंग दुकानों में चाइनीज मांझे की जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
पतंगबाजी के काफी शौकीन
शहर में पतंगबाजी के काफी शौकीन हैं। गर्मियों की छुट्टियों के अलावा 15 अगस्त, 26 जनवरी, नाग पंचमी, बसंत पंचमी, रक्षाबंधन समेत अन्य अवसरों में पतंगें उड़ाई जाती हैं। यह पतंगबाजी अधिकतर मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ज्यादा उड़ती हैं। इनमें चमनगंज, बेकनगंज, अनवरगंज, ग्वालटोली, परेड, पटकापुर, रेलबाजार, बाबूपुरवा, किदवईनगर, नौबस्ता, बर्रा, कल्याणपुर, रावतपुर, मूलगंज आदि शामिल हैं।
चाइनीज मांझा आसानी से नहीं टूटता
मेस्टन रोड के एक दुकानदार ने बताया कि चाइनीज मांझा आसानी से नहीं टूटता है। उसमें कांच के साथ कई तरह के मेटल और फाइबर या नायलॉन मिलाया जाता है, जिससे यह मजबूत हो जाता है। सामान्य धागा सूती होता है। उसमें बहुत ही बारीक कांच के कण मिलाए जाते हैं। यह किसी से टकराने पर टूट जाता है। पुराने समय में इसको जंजीरा मांझा भी कहा जाता था। इसकी लटाई आज भी आ रही है। चाइनीज मांझा का धागा बिल्कुल मछली पकड़ने वाले धागे जैसा मजबूत होता है। खींचने पर टूटता नहीं है।
चाइनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर कोई भी दुकानदार इसकी बिक्री करता हुआ मिलता है तो उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर की जाएगी। थानेदारों और चौकी प्रभारियों को नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। - रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर