लूट व माल की बरामदगी के 19 साल पुराने मुकदमे में अपर जिला जज सप्तम आजाद सिंह ने गुरुवार को पांच दोषियों को सात-सात साल कैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की कुल रकम 1.25 लाख रुपये में से 75 हजार रुपये घटना में मृतक ड्राइवर और क्लीनर के परिजनों को आधी-आधी दी जाएगी।
सरसौल के चौकीदार किशन ने चार दिसंबर 2005 को महुआ गांव मोड़ के पास दो शव सड़क किनारे पड़े होने की सूचना दी थी इनकी गोली मारकर हत्या की गई थी। किशन की तहरीर पर महाराजपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। दोनों की शिनाख्त ट्रक चालक दिनेश सिंह उर्फ मामा उर्फ लाल सिंह और क्लीनर सुनील तिवारी उर्फ छुन्नू के रूप में हुई थी। विवेचना में सामने आया था कि दिनेश और छुन्नू कोलकाता से ट्रक में नाल्को कंपनी का एल्युमिनियम का तार लाद कर चले थे और रास्ते में दोनों की हत्या कर ट्रक में लदा लगभग 20 लाख रुपये का तार लूट लिया गया।
पुलिस ने लखनऊ के चिनहट में स्थित ओम केमिकल टाइल्स फैक्टरी के मालिक लखनऊ निवासी विकास श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लूटा गया तार बरामद कर लिया था। विवेचना के बाद फतेहपुर के थरियांव निवासी भोला उर्फ महेश चंद्र, दिनेश गुप्ता उर्फ दिन्ने, सहेश गुप्ता, ललित गुप्ता, अमित कुमार मौर्य, राजू गुप्ता, फूल सिंह, अवधेश कुमार मौर्य और लखनऊ के त्रिवेणी नगर निवासी विकास कुमार श्रीवास्तव व लखनऊ के इंदिरानगर निवासी सभापति मिश्रा के खिलाफ लूट व लूट का माल रखने के आरोप में चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सहेश गुप्ता की मौत हो गई। सबूतों के अभाव में अवधेश कुमार मौर्य, फूल सिंह, राजू गुप्ता, दिनेश उर्फ दिन्ने को बरी कर दिया गया। भोला, ललित और अमित ने लूट का माल विकास और सभापति को बेचा था।
माल विकास और सभापति की फैक्ट्री से बरामद हुआ था। कोर्ट ने माना कि पांचों को लूट का माल होने की जानकारी थी इसलिए पांचों दोषी हैं। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने भोला, ललित, अमित, विकास और सभापति मिश्रा को दोषी मानकर सजा सुनाई।