जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जीडी यादव ने बताया कि ठंड बढ़ने के बाद रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। सिगरेट और तंबाकू के लती लोगों को यह दिक्कत अधिक होती है। इसके साथ ही जिन्हें ऑटो इम्यून बीमारियां हैं, उन्हें भी परेशानी है।
ठंड में रक्त प्रवाह प्रभावित होने से रोगियों की उंगलियां काली पड़ने लगी हैं, जो लोग बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू के लती हैं उन्हें दिक्कत अधिक बढ़ रही है। इसके साथ ही ऑटो इम्यून बीमारियों में भी यह समस्या हो गई। उंगलियों में खून का बहाव अधिक दिनों तक प्रभावित होने से गैंगरीन हो जाता है।
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इससे काली पड़ने वाली उंगलियों को काटना पड़ता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जीडी यादव ने बताया कि ठंड बढ़ने के बाद रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। सिगरेट और तंबाकू के लती लोगों को यह दिक्कत अधिक होती है। इसके साथ ही जिन्हें ऑटो इम्यून बीमारियां हैं, उन्हें भी परेशानी है।
हर साल शीतलहर चलने पर यह दिक्कत होने लगती है। बीते साल जनवरी के महीने में 50 रोगी आए थे। इनमें छह रोगियों की उंगलियां काटनी पड़ गई थीं। अगर गैंगरीन प्रभावित अंग को काटा न जाए तो सड़न बढ़ती जाती है। शहर और ग्रामीण दोनों इलाकों के रोगी इस समस्या से ग्रसित होते हैं।
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इस वजह से उंगलियां पड़ती काली
ऑटो इम्यून रोग और तंबाकू के लती लोगों की आर्टरी पर दुष्प्रभाव पड़ता है। आर्टरी उन रक्तवाहिनियों को कहते हैं जो हृदय से ऑक्सीजनयुक्त रक्त शरीर में पहुंचाती हैं। ठंड से आर्टरी में सिकुड़न आती है। हाथ-पैर की उंगलियों की टिप पर खून नहीं पहुंच पाता। इससे ये नीली, फिर काली पड़ती हैं। रक्त न पाने पर कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। इससे गैंगरीन होता है। स्वस्थ अंग को बचाने के लिए गैंगरीन प्रभावित अंग को काटना पड़ता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- उंगलियों को गर्म रखें, मोजे दास्ताने पहनें
- बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू का सेवन बंद कर दें।
- ऑटो इम्यून बीमारियों के रोगी समय से दवाएं लें।
- ठंड से बचाव रखें, हाथ-पैर को सेंकते रहें।
- उंगलियां नीली पड़ने पर डॉक्टर को दिखाएं।