हैलट के नेत्र रोग विभाग में नेत्र बैंक शुरू हो गया है। यह राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पहला है और प्रदेश में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के बाद दूसरा नेत्र बैंक है। नेत्र बैंक शुरू होने से मंडल समेत 18 जिलों के कार्नियल अंधता से पीड़ित रोगियों को राहत मिलेगी। बैंक में नेत्रदान से मिले कार्निया को 14 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। अभी तक चार दिन ही कार्निया सुरक्षित रह पाती हैं। साथ ही किसी अन्य जिले में कोई विशेषज्ञ कार्निया प्रत्यारोपण करना चाहेगा तो उसे नेत्र बैंक से कार्निया उपलब्ध करा दी जाएगी।
मंगलवार को विधायक नीलिमा कटियार ने फीता काटकर कानपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए नेत्र बैंक का उद्घाटन किया। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि नेत्र बैंक के भवन का शिलान्यास 12 अक्तूबर 2024 में हुआ था। तीन माह में निर्माण कार्य पूरा हो गया। कुल लागत डेढ़ करोड़ रुपये है। इसमें एक करोड़ रुपये की मशीनें हैं। उन्होंने बताया कि हाई टेक मोरया माइक्रोकेरोटोन मशीन से 550 माइक्रॉन की कार्निया की पर्तों को आसानी से अलग किया जा सकता है। एक कार्निया का इस्तेमाल चार रोगियों पर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि लेमिनार फ्लोहुड मशीन से कार्निया की संक्रमण रहित प्रोसेसिंग होती है। फ्लैश ऑटो क्लेव से आठ मिनट में उपकरण संक्रमण रहित हो जाते हैं। वैसे उपकरण स्टेराइल करने में डेढ़ घंटे लगते हैं। साथ ही नेत्र बैंक में स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। डॉ. पारुल सिंह ने विभाग की उपलब्धियों के संबंध में प्रस्तुति दी। उद्घाटन समारोह में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला, उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह, ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कनौजिया, डॉ. सुरभि अग्रवाल, डॉ. नम्रता पटेल आदि मौजूद रहीं।