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Kanpur: समुद्र में फंसे 500 करोड़ के निर्यात ऑर्डर, 300 कंटेनर माल लदे जहाज बंदरगाहों में रुके, ये है स्थिति

Fri, 06 Mar 2026 10:15 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मध्य पूर्व युद्ध के कारण कानपुर का 500 करोड़ का निर्यात समुद्र के बीच फंस गया है और होर्मुज जलडमरू बंद होने से सप्लाई चेन टूट गई है। ईंधन महंगा होने और मालभाड़े में 20% तक की संभावित बढ़ोतरी ने निर्यातकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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आलोक श्रीवास्तव और असद इराकी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध बढ़ता जा रहा है। इसके चलते शहर के निर्यातकों के 500 करोड़ के निर्यात ऑर्डर बीच समुद्र में फंस गए हैं। होर्मुज जलडमरू मध्य बंद हो गया है। खाड़ी देशों के एयरपोर्ट बंद होने से शिपिंग कंपनियां अन्य रूटों से कंटेनर ले जा रही हैं, लेकिन अलग-अलग देशों के बंदरगाहों पर जगह न होने और उन्हें जगह देने से मना किए जाने पर शिपिंग कंपनियों ने समुद्र के बीच में ही जहाज खड़े कर दिए हैं। निर्यातकों को कोई भी जानकारी नहीं दी जा रही है। किस रूट पर और कहां से माल ले जाएंगे, इस पर भी कुछ भी नहीं बताया जा रहा है।

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निर्यातकों से शिपिंग कंपनियां कह रही हैं कि वह कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। इससे निर्यातक परेशान हो रहे हैं। अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था। होर्मुज जलडमरू मध्य बंद हो गया है। इससे कच्चे तेल के दाम 8.3 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। आगे भी ये तेजी से बढ़ेंगे। इससे 15-20 प्रतिशत तक मालभाड़ा बढ़ना तय हो गया है। युद्ध लंबा से उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों में आपूर्ति लड़खड़ाने का डर भी हो गया है। दुबई में एयरपोर्ट बंद होने से यूरोप के बाजारों पर भी असर पड़ गया है।

यूरोप के देशों को जाने वाला माल रोक दिया गया
समुद्री मार्ग से जा रहा 300 कंटेनर माल नजदीक के देशों के बंदरगाहों में सुरक्षित स्थान खोज रहा है। संभावना है कि शिपिंग कंपनियां जल्द मालभाड़ा बढ़ा सकती हैं। इससे निर्यातकों को दोहरा झटका लग सकता है। अब तक करीब 300 करोड़ का नया निर्यात ऑर्डर रोक दिया गया है। खाड़ी देशों, इस्राइल और ईरान को अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ, चमड़ा उत्पादों का निर्यात किया जाता है। युद्ध के चलते माल और भुगतान फंसने के डर से निर्यातकों ने नए ऑर्डर रोक दिए हैं। दुबई एयरपोर्ट बंद होने से सिंगापुर, यूरोप के देशों को जाने वाला माल रोक दिया गया है।

500-700 करोड़ का किया जाता है निर्यात
जानकारों का कहना है कि युद्ध के कारण ईंधन महंगा हो गया है, जिससे मालभाड़ा भी 15-20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। शुरुआत में शिपिंग कंपनियां और निर्यातक समुद्री मार्ग के जरिये अलग-अलग देशों में जा रहे कंटेनरों की सुरक्षा पर जोर दे रही थीं लेकिन अब परिस्थितियां और बिगड़ गईं। गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल में बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इन देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। ईरान ने इन सभी जगहों पर मिसाइलें दागी हैं। शहर से इन सभी देशों को 500-700 करोड़ का निर्यात किया जाता है। इन सभी देशों में हालात बिगड़ रहे हैं।

करीब 300 कंटेनर समुद्री मार्ग से अलग-अलग देशों में जा रहे थे। उन्हें नजदीक के देशों के बंदरगाहों पर रोका जा रहा था लेकिन अब वहां से भी उन्हें हटाने के लिए शिपिंग कंपनियों को कहा गया है। सरकार ने निर्यातकों की समस्या समाधान के लिए टास्क फोर्स भी बनाई है। युद्ध लंबा खिंचा तो निर्यातकों को दोहरा झटका लगेगा। मालभाड़ा तो बढ़ना तय है। इससे उत्पाद महंगे हो जाएंगे।  -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन
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शहर के निर्यातकों के 500 करोड़ के करीब निर्यात ऑर्डर बीच समुद्र में फंस गए हैं। होर्मुज जलडमरू मध्य बंद हो गया है। खाड़ी देशों के एयरपोर्ट बंद होने से शिपिंग कंपनियां अन्य रूटों से सामान ले जा रही हैं लेकिन अलग-अलग देशों के पोर्टों पर जगह न होने और उन्हें जगह देने से मना किए जाने पर शिपिंग कंपनियों ने अलग-अलग समुद्र के बीच में ही जहाज खड़े कर दिए हैं।  -असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
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