कानपुर। दिल्ली-वाराणसी होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कानपुर को शामिल न किए जाने पर शहर में निराशा और नाराजगी का माहौल है। केंद्रीय रेल मंत्री के हालिया ऐलान के बाद उद्योग जगत और शहर के बुद्धिजीवियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। उनका कहना है कि देश के प्रमुख औद्योगिक, शैक्षणिक और परिवहन केंद्रों में शामिल कानपुर को इस महत्वाकांक्षी परियोजना से बाहर रखना समझ से परे है।
प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल सेठ ने कहा कि यह खबर शहर के लिए झकझोर देने वाली है। उनके अनुसार कानपुर कभी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता था। पिछले कई दशक से अपनी पहचान और विकास के लिए संघर्ष कर रहा है। आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की तरफ से शहर की आवाज को पर्याप्त मजबूती से न उठाए जाने का खामियाजा शहर को भुगतना पड़ रहा है।
उद्योग जगत का मानना है कि कानपुर को बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने पर व्यापार, निवेश और लॉजिस्टिक्स को बड़ा लाभ मिलता। शहर को परियोजना से बाहर रखे जाने से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या विकास की तेज रफ्तार में कानपुर लगातार पीछे छूटता जा रहा है।