कोरोना वायरस से बचाव को इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने में भिंड़ी भी मददगार हो सकती है। दरअसल, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के शाकभाजी अनुभाग के डॉ. राजीव का कहना है कि भिंडी भी विटामिन सी का उत्तम स्रोत है।
विटामिन सी जल में घुलनशील होता है और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। इसके अतिरिक्त भिंडी में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे तत्व भी भरपूर मात्रा में मिलते हैं। उन्होंने बताया कि भिंडी में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है।
यह सेहत के लिए फायदेमंद होती है। अल्सर व मधुमेह रोग में भिंडी का सेवन फायदेमंद है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है। इससे यह गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करता है। उन्होंने बताया कि भिंडी में लेक्टिन प्रोटीन होता है जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।
भिंडी में तत्वों की मात्रा
एक कप (100 ग्राम) कच्ची भिंडी में 33 कैलोरी ऊर्जा, 1.39 ग्राम प्रोटीन, 23 मिलीग्राम विटामिन सी, 82 मिलीग्राम कैल्शियम, 299 मिलीग्राम पोटैशियम, 57 ग्राम मैग्नीशियम व 0.62 मिलीग्राम लोहा पाया जाता है।
दूसरे-तीसरे दिन करें तुड़ाई
डॉ. राजीव ने बताया कि गर्मी में भिंडी की पौध करीब डेढ़ से दो माह की हो गई है। इसकी तुड़ाई का काम भी चल रहा है। उन्होंने सलाह दी कि जब इसके पौधे में फलियां नरम और खाने योग्य हो जाएं तो उसे तोड़ लें। भिंडी की तुड़ाई हर दूसरे-तीसरे दिन तुड़ाई करते रहें। अधिक उपज प्राप्त करने को नाइट्रोजन और सूक्ष्म पोषक तत्व वाले उर्वरक का इस्तेमाल करें।
कीटों से ऐसे करें बचाव
भिंडी की फसल में सफेद मक्खी तथा हरा फुदका जैसे हानिकारक कीट लगते हैं। इससे बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड ( तीन मिलीलीटर मात्रा प्रति 10 लीटर पानी में) या डाईमेथोयत (1 ग्राम मात्रा 1 लीटर पानी में) का दो-तीन बार छिड़काव करें। फली बेधक कीट का प्रकोप होने पर ट्राईकोग्रामा नामक परजीवी को जैविक विधि से इस्तेमाल करें। पीला मोजेक रोग की रोकथाम को इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें।