रोगियों का पूरा इंडोक्राइन सिस्टम प्रभावित हो गया
अध्ययन के अगुवा और इंडोक्रोनोलॉजी क्लीनिक प्रभारी डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि इन रोगियों के खून और पेशाब की जांच कराई गई। इसमें बीपी-ए तत्व का लेवल बहुत अधिक निकला। इसकी वजह से इंसुलिन रिसेस्टेंस बढ़ा। बीपी-ए का बुरा असर रोगियों के पैंक्रियाज पर आया। इससे पैंक्रियाज की बीटा सेल नष्ट होने लगीं। उन्होंने बताया कि रोगियों का पूरा इंडोक्राइन सिस्टम प्रभावित हो गया। इंसुलिन बनना कम हो गया। इसके अलावा इंसुलिन का कार्य भी सुस्त पड़ गया।
बीपी-ए का लेवल और अधिक बढ़ जाता है
उन्होंने बताया कि प्लास्टिक की पैकिंग में आने वाली चीजों को खाने से भी यही नुकसान होगा। प्लास्टिक के बर्तन में गर्म खाने की चीजों को रखने से बीपी-ए का लेवल और अधिक बढ़ जाता है। बीपी-ए का दुष्प्रभाव पैंक्रियाज के अलावा लिवर और गुर्दों पर भी आता है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि पहले चरण के अध्ययन के बाद अब इस पर और विस्तृत शोध किया जाएगा। अब इसी आयु वर्ग के 400 रोगियों पर शोध करेंगे।
चूहों में भी आए ऐसे ही लक्षण
डॉ. गुप्ता ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर चूहों पर हुए शोध के नतीजे भी इसी तरह के आए हैं। प्लास्टिक के बर्तन में खाना रखने के बाद चूहों को खिलाया गया। इस खाने में बीपी-ए मिला हुआ था। जब चूहों की जांच की गई, तो उनका इंडोक्राइन सिस्टम डैमेज मिला और इंसुलिन रिसेस्टेंस हो गया था।
किशोरों को भी हो रही है डायबिटीज
किशोरों को भी टाइप-2 डायबिटीज हो रही है। शहर के विभिन्न डॉक्टरों के यहां इनका इलाज चल रहा है। बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि अव्यवस्थित दिनचर्या, खानपान, व्यायाम की कमी, मोटापे की वजह से किशोरों को डायबिटीज की दिक्कत हो रही है। रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।