परिवारों में रोजी-रोटी का संकट गहरा गया
पुरवामीर गांव में हाईवे किनारे अपने घर पर मिट्टी के बर्तन बनाने वाले धुन्नी कुम्हार ने बताया कि यह काम उनकी कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। मिट्टी के बर्तन बनाकर ही वे पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सरकार द्वारा कुम्हारों के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में बर्तन बनाने के लिए अब मिट्टी तक नहीं मिल पाती। महंगाई बढ़ने से लोग अब मिट्टी के बर्तन और दीपक कम इस्तेमाल करते हैं, जिससे परिवारों में रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
मिट्टी से बने दीपक का ही इस्तेमाल करें
भावुक होकर अपील करते हुए धुन्नी कुम्हार ने कहा कि आप सभी खुशी से दिवाली का पर्व मनाएं, लेकिन इस दिवाली हमको और हमारे परिवार को भी ध्यान में रखें। मिट्टी से बने दीपक का इस्तेमाल करें, इससे शुद्ध और कुछ नहीं हो सकता। दिवाली भी शुद्ध रूप से मनेगी और हमारे परिवारों का भरण-पोषण भी हो पाएगा। बाजारों में मिट्टी के बर्तन और दीपकों की बिक्री शुरू हो चुकी है। इन कुम्हारों की अपील पर समाजसेवकों ने भी लोगों से अपील की है कि मिट्टी से लाखों परिवार चल रहे हैं, इसमें हम सहयोगी बनें।