सोच की दिशा, दशा और विभिन्न पहलुओं को परखेगा
यह जेन जी की सोच के साथ ही उनकी मानसिकता और धारणाओं के संबंध में पता लगाएगी। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि जेन जी के अध्ययन के लिए 10 टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक सदस्य साइकोलॉजिकल टूल के जरिये जेन जी के मिजाज का अध्ययन करेंगे। टूल्स विश्व स्वास्थ्य संगठन के हैं। यह अपने तरह का प्रदेश का पहला अध्ययन होगा। यह युवा हुई नई पीढ़ी के सोच की दिशा, दशा और विभिन्न पहलुओं को परखेगा।
पापा-मम्मी अच्छे लगते या तन्हाई
विशेषज्ञों के मुताबिक शोध में यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि जेन जी में सिंगल चाइल्ड की क्या मनोदशा रहती है। उन्हें मम्मी के साथ अधिक खुशी मिलती है या पापा के साथ। या फिर दोनों को छोड़कर तन्हाई पसंद है। इससे सामाजिक दृष्टिकोण की जानकारी मिल सकेगी।
स्क्रीन एडिक्शन रहेगा शामिल
इस अध्ययन में एक महत्वपूर्ण बिंदु स्क्रीन एडिक्शन काे भी शामिल किया गया है। जेन जी से जाना जाएगा कि उन्हें मोबाइल फोन, लैपटॉप की स्क्रीन में कितने घंटे समय बिताना अच्छा लगता है। वह किस नजरिये से इसे देखते हैं। वे अपनी समस्याओं के हल करने की पहल कहां से करते हैं। अवसाद और तनाव का स्तर भी पता चलेगा।