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Kanpur: डेंगू अपने पीक की ओर, हर तीसरे साल लेता है घातक रूप, तेजी से बढ़ रहे मरीज

Sat, 29 Oct 2022 09:24 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में टाइगर मच्छरों की तादाद बढ़ गई है। रोज दहाई के अंकों में मरीज मिलने लगे हैं। खतरनाक बात यह है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से इन मच्छरों की सक्रियता अवधि भी बढ़ गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हर तीसरे साल डेंगू का पीक आने के पिछले अनुभव के बावजूद कानपुर के स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह बना रहा। न तो पुराने अनुभव से उसने कोई सबक लिया, न ही डेंगू फैलने के बाद इससे निपटने के लिए पूरी ताकत झोंकी। इस जानलेवा लापरवाही का नतीजा है कि शहर में टाइगर मच्छरों की तादाद बढ़ गई। रोज दहाई के अंकों में मरीज मिलने लगे।

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खतरनाक बात यह है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से इन मच्छरों की सक्रियता अवधि भी बढ़ गई है। पिछले रिकॉर्ड बताते हैं कि 2016 में शहर में डेंगू फैला था और तब सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आए थे। एक दरोगा सहित कई मरीजों की मौत भी हुई थी। इसके बाद 2017 और 2018 में डेंगू के गिने-चुने मरीज मिले लेकिन 2019 में टाइगर मच्छर (एडीज) पुन: घातक रूप में सामने आया था। कई को जान गंवानी पड़ी थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग डेंगू से मौतों से इनकार करता रहा जबकि तब हुई जांच में डेंगू के चारों स्ट्रेन (डेन-1, डेन-2, डेन-3, डेन-4) मिलने की पुष्टि हुई थी।

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2019 में राहत की बात यह थी कि हल्की ठंड शुरू होते ही डेंगू थमने लगा था। ज्यादा ठंड पड़ते ही ऐसे मरीज मिलने बंद हो गए थे। पर, इस बार हल्की ठंड शुरू होते ही डेंगू के मरीज बढ़ने लगे हैं। नगर में 12 साल से ज्यादा समय तक जिला महामारी वैज्ञानिक पद पर तैनात रहे डॉ. देव सिंह ने बताया कि तीन साल में डेंगू का पीक आता है। उनका मानना है कि इस पूर्वानुमान के बावजूद विभागीय सक्रियता की कमी से फिर इस रोग का पीक शुरू हो गया है। अभी भी सफाई, फागिंग, दवा के छिड़काव आदि से थोड़ी राहत मिल सकती है।

किया होना चाहिए, जो नहीं हो रहा
- कहीं भी जलभराव न होने दें, हो तो एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाए। 
- शहर के सभी नाले-नालियों में भी एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाए। 
- शहर में एंटी लार्वा छिड़काव और सघन फागिंग शाम को एक साथ हो। 
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आप कर सकते हैं बचाव के ये उपाय
- कूलर, छत में रखे सामान, कबाड़ में पानी पांच दिन से ज्यादा भरा न रहने दें। 
- मच्छरमार अगरबत्ती का कम से कम उपयोग करें, मच्छरदानी का उपयोग करें। 
- मच्छर पसीने की दुर्गंध से आकर्षित होते हैं। इसलिए सफाई रखें, फुल कपड़े पहनें। 
पिछले साल इन दिनों तक डेंगू के 400 मरीज हो गए थे, इस साल अभी तक 122 केस ही मिले हैं। जहां मरीज मिल रहे हैं, वहां नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अभियान चला रही हैं। दिन में एंटीलार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। शाम को फॉगिंग हो रही है। नर्सिंगहोम संचालकों से डेंगू के मरीजों के सैंपल मांगे हैं, उनकी क्रास चेकिंग कराऊंगा।- डॉ. आलोक रंजन, सीएमओ
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