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तीन दिनों से पीपा पुल क्षतिग्रस्त, जानजोखिम में डालते लोग

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पानी के बीच से होते हुए पुल तक जाती महिला। - फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात/राजपुर। बेहमई के पास गौरीरतन बांगर गांव में यमुना नदी पर बने पीपा पुल की मरम्मत तीसरे दिन भी नहीं हो सकी। लोग जान जोखिम में डालकर जलधारा पर रखी चलही से यमुना पार करते रहे। वाहन चालकों को 60 किलो मीटर का चक्कर लगाना पड़ा।
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बेहमई गांव से डेढ़ किलोमीटर दूरी पर गौरी रतन बांगर गांव के समीप यमुना नदी में पीपे का पुल जालौन जाने के लिए अस्थाई रूप से बनाया गया था। इसका संचालन 19 दिन पहले हुआ था। बारिश होने के कारण यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इस कारण शुक्रवार को तीन पीपे यमुना में डूब गए थे। चहली में पानी के थपेड़े लगने से बल्लियां टूट गई थीं। इससे आवागमन ठप हो गया था। रविवार को मरम्मत के बाद सोमवार को पीपा पुल से आवागमन शुरू हो गया था। मरम्मत के एक दिन बाद ही मंगलवार को यमुना में तेज बहाव के कारण पीपा पुल फिर क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे आवागमन ठप हो गया था।
गुरुवार को मरम्मत के लिए दोपहर तीन बजे मजदूर मौके पर पहुंचे। इसके बाद उन्हों मिट्टी डालने व चलही बनाने का काम शुरू किया। पिछले तीन दिनों से आवागमन ठप होने से परेशान लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करते रहे। कुछ लोगों ने भोगनीपुर व कालपी होते हुए 60 किलोमीटर का चक्कर लगाकर यात्रा करने में ही भलाई समझी।
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मंगलवार को क्षतिग्रस्त हुए पीपा पुल के गुरुवार को चालू होने की उम्मीद थी। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बार-बार डाली जा रही मिट्टी बह जाती है। इस कारण मरम्मत कार्य में बाधा आ रही है। पीडब्ल्यूडी जेई ने बताया कि चलही बनाने का काम जोरों पर है। शनिवार तक क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत होने की उम्मीद है। इसके बाद ही आवागमन के लिए चालू किया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के जेई राधेश्याम ने बताया कि गुरुवार तक मजदूरों ने तीन चलही बनाकर तैयार कर ली हैं। चार और चलही बनाई जाएगी। क्षतिग्रस्त पीपा पुल की मरम्मत कराने का काम तेजी पर है।
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