बिल्हौर। क्षेत्रीय किसान गेहूं खरीद केंद्रों और उत्तरीपुरा मंडी समिति की बदहाल व्यवस्था और समय से भुगतान न करने से निजी आढ़तों पर गेहूं बेच रहे हैं। वहीं डिमांड बढ़ने पर निजी आढ़तों में प्रति क्विंटल गेहूं के भाव एक हजार आठ सौ पचास रुपये से अधिक तक पहुंच गए। निजी आढ़तों पर नकद भुगतान होने से किसान वहां का रुख कर रहे हैं। अब उत्तरीपुरा मंडी समिति और इसके अंतर्गत संचालित गेहूं खरीद केंद्रों पर सन्नाटा है।
तहसील क्षेत्र में लॉकडाउन के बीच गांव-गांव किसानों की सहूलियत के लिए खोले गए गेहूं खरीद केंद्रों पर कई प्रकार की समस्याओं को देखते हुए अब सन्नाटा छा गया है। सांभी किसान छोटे बउआ, माखन निवासी के किसान राम सेवक, शिवसिंह, चेतपुरवा के विजय, डोडवा के राकेश ने बताया कि उत्तरीपुरा मंडी और गेहूं खरीद केंद्रों पर कर्मियों से गेहूं खरीद में कई प्रकार की आनाकानी करने, पंजीयन कराने सहित कई प्रकार अन्य समस्याओं सहित समय से भुगतान न होने पर उन्होंने बाजार में सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,925 रुपये प्रति क्विंटल के सापेक्ष मात्र 1,850 रुपये प्रति क्विंटल पर फसल बिक्री कर नकद भुगतान भी ले लिया है। उक्त किसानों ने क्षेत्र उत्तरीपुरा मंडी में कई सुरक्षाकर्मियों व अन्य कर्मियों पर भेदभाव का भी आरोप लगाया, साथ ही किसानों ने मंडी सचिव पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई न करने की बात भी कही।
मंडी सचिव, उत्तरीपुरा अनूप दीक्षित ने बताया कि मंडी के खरीद केंद्रों पर क्षेत्रीय किसानों की आवक कम हैं, कर्मियों द्वारा भेदभाव और पक्षपात की बात निराधार है, यदि किसी भी किसान को मंडी और उसके केंद्र के संबंध को भी समस्या है वह तत्काल मुझे बताए कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सभापति मंडी समिति व एसडीएम बिल्हौर साईं तेजा सीलम ने बताया कि अभी तक किसी भी किसान ने लिखित व मौखिक रूप से उत्तरीपुरा मंडी समिति व उसके केंद्रों पर खरीद को लेकर उन्हें नहीं बताया है वह जल्द औचक निरीक्षण कर उचित कार्रवाई करेंगे।