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शिक्षकों का हल्का हुआ भार, अब स्कूलों तक पहुंचाई जाएंगी किताबें

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कानपुर देहात। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जिले व ब्लाक कार्यकारिणी की बैठक गूगल मीट के माध्यम से हुई। प्रदेश महामंत्री भगवती सिंह ने कहा कि इस बार पुस्तकों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने बजट जारी किया है। इसकी जिम्मेदारी बीईओ को सौंपी गई है। कोई शिक्षक बीआरसी से पुस्तकें न ढोएं। बैठक के दौरान संगठन के प्रदेश महामंत्री भगवती सिंह ने कहा कि अभी तक बच्चों को दी जाने वाली निशुल्क पुस्तकों को बीआरसी से स्कूल तक ले जाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती थी। इससे शिक्षण कार्य में व्यवधान होता था। इसे देखते हुए शासन ने पहली बार स्कूलों तक पुस्तकें पहुंचाने की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों की तय करते हुए इसके लिए बजट भी जारी किया है। अब शिक्षक पुस्तकों को लेकर परेशान न हों। जिला अध्यक्ष प्रदीप कुमार तिवारी ने कहा कि बिना संसाधन शिक्षकों पर लादे गये कार्याें का विरोध होगा।
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उम्मीद है नई शिक्षा नीति के तहत जल्द ही शिक्षकों को मिडडे मील की जिम्मेदारी से मुक्ति मिलेगी। विद्यालय के एक शिक्षक का पूरा समय भोजन की व्यवस्था में ही खर्च हो जाता है। संगठन के महामंत्री शैलेंद्र तिवारी ने चयन वेतन मान के लंबित मामलों के निस्तारण की रणनीति पर चर्चा की। बैठक का संचालन कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार शुक्ल ने किया। इस दौरान गूगल मीट के माध्यम से पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश यादव, अनंत त्रिवेदी, सुनील सचान, संजय सचान, राहुल शुक्ल, डा. इंद्र कुमार आदि जुड़े रहे।
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