कानपुर देहात। छह फैक्टरियों की ओर से डंप 62 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम अब खानचंद्रपुर रनियां के विकास कार्यों में रोड़ा बनता जा रहा है। मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन की तरफ से दवाएं रखने के लिए अधिगृहीत जिला स्तरीय ड्रग वेयर हाउस को लेने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ मना कर दिया है। उन्होंने क्रोमियम के चलते वहां तैनात होने वाले कर्मचारियों के बीमार होने का आशंका जताई है।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से जनपदीय ड्रग वेयर हाउस में दवाओं की खेप भेजी जाती है। वहां से जिला अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं को पहुंचाया जाता है। अभी तक अकबरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बने वेयर हाउस पर दवाएं आती हैं, लेकिन वहां अपेक्षाकृत कम जगह होने से समस्या रहती है। इस पर मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन ने रनियां के खानचंद्रपुर रोड पर वरुन अग्रवाल के वेयर हाउस को अधिगृहीत किया था। ताकि वहां पर दवाओं को स्टोर किया जा जा सके। कारपोरेशन के अधिशाषी निदेशक ने सात नवंबर को पत्र भेजकर सीएमएसडी स्टोर के फार्मासिस्ट को वेयर हाउस अपने अधिकार में लेने के निर्देश दिए थे।
फार्मासिस्ट धर्मेंद्र कुमार की टीम ने जब मौके का निरीक्षण किया, तो वेयर हाउस के आसपास क्रोमियम का ढेर मिला। इससे वहां की मिट्टी व पानी पूरी तरह से दूषित हो चुका है और आसपास गांवों के लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। पिछले दिनों नेशनल एनजीटी ने क्रोमियम डंप करने वाली सभी छह फैक्टरियों पर 280 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी क्रोमियम के कारण वेयर हाउस में तैनात होने वाले कर्मी के बीमार होने का आशंका जताते हुए उसे लेने से साफ इंकार कर दिया।
सीएमओ डॉ हीरा सिंह ने बताया कि कारपोरेशन ने जिस वेयर हाउस का अधिग्रहण किया है। वहां पर क्रोमियम के ढेर लगे हैं। इससे तैनात होने वाले कर्मी के बीमार होने का खतरा है। अधिकारियों को इस बारे में सूचना दी गई है। दूसरी जगह को वेयर हाउस के लिए चिह्नित किया जा रहा है।
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न शौचालय न सुरक्षा, चोरी की बताया खतरा
निरीक्षण करने गए फार्मासिस्ट ने बताया कि कारपोरेशन ने जिस वेयर हाउस को अधिगृहीत किया है। वहां पर शौचालय तक नहीं है। सूनसान इलाका होने के कारण दवाएं चोरी होने की भी संभावना है। आवागमन का रास्ता भी कच्चा है। ऐसे में वहां आने वाले वाहनों को समस्या होगी। इसके अलावा अकबरपुर की ओर से आने वाले वाहनों को टोल टैक्स भी देना होगा। इससे अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
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इसलिए जरूरी है जनपदीय ड्रग वेयरहाउस
सीएमओ डा. हीरा सिंह ने बताया कि बढ़ती मरीजों की संख्या के अनुसार कारपोरेशन से बड़ी मात्रा में दवाओं की खेप भेजी जाती है। इसके बाद दवाओं का नमूना जिले से लैब को परीक्षण के लिए भेजा जाता है। सही रिपोर्ट आने के बाद अस्पतालों में दवाएं भेजी जाती हैं। सीएचसी में बने वेयर हाउस में पर्याप्त जगह नहीं है। इसमें सीमित मात्रा में दवाएं ही रखी जाती हैं। वहीं, कई बार दवाओं की नमूना रिपोर्ट आने में देरी होती है और स्टाक कम होने से दवाओं का टोटा हो जाता है। मालूम हो कि अक्तूबर माह में ग्लूकोज खत्म होने कोहराम मचा था।