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बीनते थे गेहूं की बाली अब बनेंगे असिस्टेंट कमांडेंट, सीएपीएफ परीक्षा में पाई 334वीं रैंक

Tue, 06 Aug 2019 03:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मैथा के मनोज ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स परीक्षा में पाई 334वीं रैंक - फोटो : अमर उजाला
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कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारो, इस कहावत को चरितार्थ किया है मैथा (कानपुर देहात) निवासी मनोज कुमार कमल ने। विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) की सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) परीक्षा में 334वीं रैंक हासिल की।
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यह परीक्षा असिस्टेंट कमांडेंट के पदों पर नियुक्ति के लिए की जाती है। परिणाम दो अगस्त को घोषित किया गया था।  मनोज के पिता रामऔतार कमल और माता शिवरानी बटाईदार किसान हैं। भाई विनोद कुमार गांव में ही साइकिल की दुकान चलाते है। बाकी भाई बहन अभी पढ़ाई कर रहे हैं।

 
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बचपन में दाल का पानी और मक्का (भुट्टा) खाकर सोने वाले मनोज अगले दिन झाड़ू की सीके काढ़ने और गेहूं की बाली बीनने जाते थे ताकि पढ़ाई के छोटे मोटे खर्च वे स्वयं उठा सकें। छठवीं क्लास में जवाहर नवोदय विद्यालय में एडमिशन लिया।

फिर 12वीं में स्कूल में टॉप किया और सीबीएसई बोर्ड से स्कॉलरशिप भी हासिल की। इसी स्कॉलरशिप से एचबीटीयू से बीटेक के बाद कैंपस से ही इंडिया यामाहा मोटर में जॉब मिली। उसके बाद हांडा कार में भी काम किया। वर्तमान में हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड, हरिद्वार में बतौर टीम मैनेजर कार्यरत हैं।

मनोज कहते हैं कि समाज और सरकारी योजनाओं का हमेशा ऋणी रहूंगा। इस ऋण को पूरा करने के लिए यूपीएससी के सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स एग्जाम दिया और 334वीं रैंक हासिल की। बता दें कि सीएपीएफ की लिखित परीक्षा 12 अगस्त 2018 को हुई थी। 24 जून से 24 जुलाई तक इंटरव्यू और पर्सनैलिटी टेस्ट हुए थे।   
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