शर्तों के साथ प्रस्ताव पारित
इनमें जमीन को बंधक नहीं बनाने, सीयूजीएल की तरफ से परियोजना की लागत का 10 प्रतिशत धन परफार्मेंस गारंटी नगर निगम में जमा करने, कोई भी अनुदान या सब्सिडी मिलने पर उसे नगर निगम के खाते में जमा करने और थर्ड पार्टी के बजाय सीधे सीयूजीएल के साथ एग्रीमेंट करने की शर्त शामिल थी। बुधवार को हुई समिति की बैठक में सीयूजीएल की तरफ से शर्तों के संबंध में दिए गए जवाब प्रस्तुत दिए। पहली शर्त के संबंध में कंपनी का कहना है कि वह परियोजना के लिए आवंटित जमीन का पट्टे के रूप में अधिकार रखेगी। दूसरी शर्त में छूट मांगी गई है।
नागपुर स्थित कूड़े से गैस बनाने वाले प्लांट का निरीक्षण किया जाएगा
तीसरी शर्त के जवाब में सीयूजीएल का कहना कि परियोजना के लिए केंद्र या राज्य सरकार से किसी तरह की छूट का लाभ नहीं लिया जा रहा है। इसलिए नगर निगम में किसी तरह की धनराशि जमा करने का प्रावधान लागू नहीं होगा जबकि चौथी शर्त पर सहमति जताई है। करीब 10 मिनट में ही संपन्न हुई बैठक के बाद महापौर ने बताया कि सीयूजीएल के प्रस्ताव को कार्यकारिणी समिति ने सीयूजीएल के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया है। अब इसे 11 मई को सदन की बैठक में रखा जाएगा। बैठक में नामकरण के तीन प्रस्ताव इस शर्त के साथ स्वीकृत किए गए कि यदि पहले संबंधित स्थलों का नामकरण न हुआ तो इन प्रस्तावों के तहत नामकरण कर दिया जाए। महापौर ने बताया कि सदन की बैठक से पहले नागपुर स्थित कूड़े से गैस बनाने वाले प्लांट का निरीक्षण किया जाएगा।
बदल जाएंगे चौराहों और पार्कों के नाम
- परेड चौराहा, लालइमली चौराहा, फजलगंज चौराहा या दादानगर चौराहे में से किसी एक का नाम भारतीय मजदूर संघ चौराहा किया जाएगा।
- सत्यम विहार, केशवनगर में विकसित किए जा रहे पार्क का नाम कपिल वाटिका किया गया।
- छपेड़ा चौराहे का नामकरण कर सुभाष चौक करना।
नगर निगम को भी होगी हर साल 25 करोड़ की बचत
कूड़ा निस्तारण प्लांट में रोज करीब 1350 मीट्रिक टन कूड़ा पहुंचता है। प्लांट के संचालन में नगर निगम के हर साल करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। सीयूजीएल के कूड़ा निस्तारण करने से नगर निगम का यह खर्च बचेगा।