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CSJMU का शोध: अब मास्क से मिलेगी शुद्ध ऑक्सीजन, प्रदूषित हवा को छानकर फेफड़ों तक पहुंचाएगा इनऑर्गेनिक ऑक्साइड

Fri, 05 Jun 2026 08:57 AM IST
Himanshu Awasthi रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: सीएसजेएमयू के वैज्ञानिकों ने इनऑर्गेनिक ऑक्साइड नाम का एक नया तत्व विकसित किया है, जो हवा से हानिकारक गैसों और कणों को अलग कर शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करता है। मास्क में इस्तेमाल होने वाली यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई है और यह भविष्य में ऑक्सीजन सेंसर व औद्योगिक कार्यों में भी बड़ी राहत दे सकती है।
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सीएसजेएमयू - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के मेटेरियल साइंस एंड मेटालर्जिकल विभाग ने एक ऐसा तत्व तैयार किया है जो प्रदूषित हवा को छानकर शुद्ध ऑक्सीजन देता है। मास्क में इनऑर्गेनिक ऑक्साइड नाम के इस तत्व की पर्त लगाने पर केवल शुद्ध ऑक्सीजन ही छनकर शरीर में जा पाती है। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो शुद्ध ऑक्सीजन के चक्कर में ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए परेशान रहते हैं।

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मेटेरियल साइंस एंड मेटालर्जिकल विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर वीके कश्यप बताते हैं कि कोविड काल में लोगों को मास्क लगाने की बाध्यता रही है। इसमें बहुत से लोगों को दिक्कत भी जाती थी। उसी वक्त इस पर काम करना शुरू किया गया जिससे लोगों को राहत मिले। अगर ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं भी मिलता है तो मास्क में ऐसी व्यवस्था रहे कि शरीर को शुद्ध ऑक्सीजन मिलती रहे।

नया तत्व इनऑर्गेनिक ऑक्साइड तैयार हुआ
इस पर वेरियम, स्ट्रोन्शियम और आयरन पर शोध किया गया। इन तत्वों को मिलाकर एक नया तत्व इनऑर्गेनिक ऑक्साइड तैयार हुआ। यह खड़िया की शक्ल का रहता है। प्रोफेसर कश्यप की अगुवाई में इनऑर्गेनिक ऑक्साइड पर किया गया मेटेरियल साइंस एंड मेटालर्जिकल विभाग का यह शोध लंदन और बर्लिन (जर्मनी) से निकलने वाले अंतरराष्ट्रीय जर्नल आयनिक्स में प्रकाशित हुआ है।

पर्दे को सिर्फ ऑक्सीजन ही पार कर पाती है
उन्होंने बताया कि इस तत्व का इस्तेमाल सिर्फ मास्क में ही नहीं बल्कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी हो सकता है, जिनमें शुद्ध ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसका इस्तेमाल ऑक्सीजन सेंसर, पंप में भी किया जा सकता है। इसके अलावा बहुत से कार्य ऐसे होते हैं, जहां शुद्ध ऑक्सीजन ही चाहिए होती है। इस तत्व का बना पर्दा नाइट्रोजन, कार्बन, प्रदूषण के कणों और गैस को रोक देता है। इस पर्दे को सिर्फ ऑक्सीजन ही पार कर पाती है।
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ऐसे करता है काम
इनऑर्गेनिक ऑक्साइड की पर्त बनाकर मास्क में लगा दी जाती है। मास्क में हीटिंग डिवाइस लगती है जो इस पर्त को सक्रिय करती है। साथ ही हवा खींचने के लिए पंप रहता है। हवा जब आती है तो ऑक्सीजन के अणु ही पर्त के उस पार जा पाते हैं। गैस और दूसरे कण रुक जाते हैं।
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