बेरोकटोक न्यायालय भवन में घूमते रहते हैं
एसएसएफ कर्मियों की तैनाती सिर्फ सुबह आने और शाम को जाने के समय न्यायिक अधिकारियों को सैल्यूट करने तक ही सीमित दिखती है। ज्यादातर कर्मी एक जगह पर ही झुंड बनाकर इकट्ठा दिखते हैं और मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, जबकि कई लोग बेवजह बेरोकटोक न्यायालय भवन में घूमते रहते हैं। मुकदमों के चलते न्यायालय में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है।
न्यायालय भवन के चारों ओर मजबूत जालियां लगाई जानी चाहिए। खुली जगहों को दीवार से बंद किया जाना चाहिए। सुरक्षा बल के जवानों की ड्यूटी के प्रति सतर्कता जरूरी है। -बिनय कुमार मिश्रा, महामंत्री, बार एसोसिएशन
न्यायालय भवन की हर मंजिल पर पॉइंट चिह्नित करके एसएसएफ कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए। एसएसएफ कर्मी हर आने-जाने वाले पर नजर रखें, तो घटनाओं पर रोक लग सकती है। -ज्ञान प्रकाश पांडे, वरिष्ठ अधिवक्ता
न्यायालय भवन की टूटी जालियां, खराब लिफ्ट को ठीक कराया जाना चाहिए। सुरक्षाकर्मियों को भी सतर्कता बरतनी चाहिए। घटनाओं को रोका भले ही न जा सके पर टाला जरूर जा सकता है। -राजीव यादव, महामंत्री, लॉयर्स एसोसिएशन
ड्यूटी के समय मोबाइल पर वीडियो या रील्स देखने वाले पुलिस या एसएसएफ कर्मियों को दंडित करने की व्यवस्था होनी चाहिए। एक जगह पर खड़े रहने के बजाय अगर सुरक्षा कर्मी घूमते-फिरते रहें। -सुरेश सिंह चौहान, वरिष्ठ अधिवक्ता