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सांसों का सौदा: कानपुर में अस्पतालों की वसूली का मीटर 10 हजार रुपये प्रतिघंटा, हैरान कर देगी ये खबर

Fri, 30 Apr 2021 03:20 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

रोगियों का सैच्युरेशन ठीक है, फिर भी उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत बता दी जाती है। ऑक्सीजन की किल्लत शुरू होने के बाद अस्पतालों को इसके नाम पर कमाई का नया जरिया मिल गया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोरोना जैसी आपदा को कुछ निजी अस्पतालों ने कमाई का जरिया मान लिया है। रोगियों से अंधाधुंध वसूली की जा रही है। रोगियों को जो बिल थमाए जा रहे हैं, उसका प्रतिघंटे 10 हजार रुपये का औसत निकल रहा है। कोविड स्टेटस वाले अस्पतालों के अलावा नॉन कोविड अस्पताल भी मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे।
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रोगियों का सैच्युरेशन ठीक है, फिर भी उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत बता दी जाती है। ऑक्सीजन की किल्लत शुरू होने के बाद अस्पतालों को इसके नाम पर कमाई का नया जरिया मिल गया है। अगर किसी रोगी का ऑक्सीजन लेवल 90 आता है, उसे डरा दिया जाता है।

इसके बाद ऑक्सीजन लगा दी जाती है। ऑक्सीजन लगते ही बिल तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसे रोगी को आईसीयू की जरूरत बताई जाती है। यहां बिल और मोटा हो जाता है। कोरोना का नया स्ट्रेन आने के बाद स्थिति और बिगड़ी है।
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इससे संक्रमित बहुत से रोगियों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट आती है और फेफड़े खराब होते हैं। इस स्ट्रेन के नाम पर रोगी को डरा दिया जाता है। निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन के अलावा और भी मद प्रबंधन ने बना रखे हैं। इनमें पीपीई किट सरीखे कई खर्च बता दिए जाते हैं।
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इससे तीमारदारों की जान की आफत आ जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने ओवर चार्जिंग के मामले में एक अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, फिर भी ऐसे मामले थम नहीं रहे। सीएमओ डॉ. अनिल मिश्रा ने इस संबंध में आदेश भी जारी किया है कि अस्पताल इस तरह की हरकतें न करें। कोरोना महामारी की चुनौतियों से निपटने में सहयोग करें।

पांच घंटे में वसूले 50 हजार
केडीए कॉलोनी जाजमऊ की रहने वाली 48 वर्षीय महिला को चुन्नीगंज के एक अस्पताल में भर्ती किया गया। पांच घंटे उसे भर्ती रखा गया। उसका बिल 50 हजार रुपये बनाया गया। उसका ऑक्सीजन लेवल 92 के आसपास था। ब्लड शुगर बढ़ी थी।

कोरोना संक्रमण नहीं था। सांस में दिक्कत नहीं थी, फिर भी उसे ऑक्सीजन लगाने की जिद की  गई और आईसीयू में रहने के लिए कहा गया। पति विदेश में होने की वजह से वह स्ट्रेस में थी। बाद में परिजन उसे क्षेत्र के दूसरे अस्पताल ले गए।
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