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कोरोना का नया स्ट्रेन: छोटे कर दे रहा फेफड़ों के एयर चैंबर, तेजी से गिरता है ऑक्सीजन सेच्युरेशन, हो जाती मौत

Sun, 02 May 2021 08:32 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. राजीव कक्कड़ का कहना है कि पहली लहर में फेफड़ों की जो स्थिति महीने भर में होती थी, अब दो-तीन दिन में हो जा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अजीतगंज की रहने वाली 37 साल की महिला को 26 अप्रैल को हल्की सी दिक्कत महसूस हुई। ऑक्सीजन सेच्युरेशन 95 से अधिक था। 27 अप्रैल की सुबह ऑक्सीजन सेच्युरेशन 90 के आसपास आया और रात को लुढ़ककर 75 पर आ गया।
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28 अप्रैल की सुबह ऑक्सीजन सेच्युरेशन 70 पर आ गिरा और कुछ देर के बाद मौत हो गई। हालत बहुत तेजी से बिगड़ी। शुरुआत में तेज खांसी, बुखार जैसे लक्षण नहीं आए। यह केस बानगी है, लेकिन ऐसी ही हालत ज्यादातर रोगियों की है, जो कोरोना के नए स्ट्रेन की चपेट में आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहली लहर में कोरोना से फेफड़ों की हालत जो एक महीने में होती थी, वह अब तीन दिन में ही हो जा रही है। इन रोगियों का डॉक्टर सीटी स्कैन करा रहे हैं। इनकी रिपोर्ट फेफड़ों की स्थिति अलग बयान कर रही है।
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हैलट और दूसरे कोविड अस्पतालों में भर्ती रोगियों की सीटी स्कैन रिपोर्ट से पता चल रहा है कि नया स्ट्रेन में फेफड़ों के एयर चैंबर सिकुड़ जा रहे हैं। साथ ही इनका लचीलापन खत्म हो जाता है।
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इससे पुरानी कार्बन डाईऑक्साइड, जिसे बाहर निकल जाना चाहिए, नहीं निकल पाती। फेफड़ों में बहुत तेजी से फाइब्रोसिस होती है। इसी से रोगी के शरीर का ऑक्सीजन लेवल बहुत तेजी से गिरता है।

ऑक्सीजन सपोर्ट देने के बाद भी स्थिति सुधर नहीं पाती। सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. राजीव कक्कड़ का कहना है कि पहली लहर में फेफड़ों की जो स्थिति महीने भर में होती थी, अब दो-तीन दिन में हो जा रही है।

सीटी स्कैन रिपोर्ट में बदलाव बहुत तेजी से पता चल रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसी स्थिति में तुरंत इलाज शुरू करा दें, जिससे फाइब्रोसिस पर नियंत्रण की कोशिश की जा सके। देर होने पर मुश्किल हो जाती है।
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