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ये जानना बेहद जरूरी: नदी के बहाव में नहीं टिकता कोरोना वायरस, जीवित कोशिकाओं के जरिये ही फैलता है

Mon, 17 May 2021 11:02 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। कोरोना निगेटिव होने के बाद भी बचाव के तरीके अपनाएं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नदी के बहाव में कोरोना वायरस नहीं टिकता है। वायरस जीवित कोशिकाओं के जरिये ही फैलता है। मृत कोशिकाओं में वायरस नहीं पनप पाता है। अमर उजाला फाउंडेशन और बीएनआई (बिजेनस नेटवर्क इंटरनेशनल) के बैनर तले डि-मिस्टीफाइंग कोविड विषय पर आयोजित वेबिनार में अमेरिकी विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश शर्मा और डॉ. अमन दीप एस डोल्ला ने यह जानकारी दी।
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वेबिनार से जुड़े लोगों ने संक्रमण को लेकर विभिन्न भ्रांतियों और गंगा में लाशें मिलने के मामले पर उनसे कई सवाल पूछे। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक चपेट में आने की आशंका से जुड़े सवाल पर उन्होंने साफ किया कि कोई जरूरी नहीं कि तीसरी लहर में बच्चे संक्रमित हों लेकिन यह सलाह जरूर दी कि सारे लोग वैक्सीन लगवा लें।

वैक्सीन से किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। इससे हर्ड इम्युनिटी होगी जिससे गंभीर संक्रमण से बचाव होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना से घबराएं नहीं, कोरोना हारेगा, लेकिन लापरवाही कतई न करें। मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। कोरोना निगेटिव होने के बाद भी बचाव के तरीके अपनाएं। वेबिनार का संचालन बीएनआई के विकास मित्तल ने किया। 
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ब्लैक फंगस से बचने के लिए ऑक्सीजन लगाने में बरतें सावधानी
विशेषज्ञों ने बताया कि कोविड संक्रमित रोगी होम आइसोलेशन में है तो ऑक्सीजन लगाने में बहुत सफाई का ध्यान रखें। नलिकाओं की सफाई के लिए नल के पानी के बजाय डिस्टिल वॉटर का इस्तेमाल करे। इससे ब्लैक फंगस से बचत रहेगी। 

एक सीमा तक घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करें
विशेषज्ञों ने बताया कि घरेलू नुस्खों के इस्तेमाल मेें कोई हर्ज नहीं। इनका एक हद तक इस्तेमाल करें। करें किसी व्यक्ति की सांस लगातार फूले, बुखार बना रहे और तकलीफ बढ़ जाए तो फौरन अस्पताल में दिखाना चाहिए। पौष्टिक और सादा भोजन लेना चाहिए। इसमें शरीर की आवश्यकता लगभग पूरी हो जाती है।

प्रतिरोधक क्षमता घटने पर ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा
विशेषज्ञों ने बताया कि वैसे तो ब्लैक फंगस मिट्टी और हवा में रहती है। प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनो कंप्रोमाइज) घटने पर इसका संक्रमण खतरनाक हो जाता है। जिस रोगी ने अधिक एस्ट्रोएड खाया हो, ब्लड शुगर अनियंत्रित हो, कैंसर सरीखे रोग हों, उनमेें ब्लैक फंगस का खतरा रहता है। इसमें दांत दर्द, सिर दर्द, नाक बंद, चेहरे पर सूजन जैसे लक्षण आ जाते हैं। 

क्वॉरंटीन पीरियड के बाद ले सकते हैं दूसरी डोज 
अगर किसी व्यक्ति को वैक्सीन की पहली डोज लगने के बाद कोरोना संक्रमण हो गया हो तो वह क्वॉरंटीन पीरियड खत्म होने के बाद दूसरी डोज ले सकता है। वैसे कोरोना के लक्षण शुरू होने के 12 सप्ताह के बाद वैक्सीन की पहली डोज लेने की गाइडलाइन  है।

इन्होंने पूछे सवाल तो मिले जवाब 
वेबिनार में नेहा पांडेय, संदीप बंसल, सीमा, धर्मेंद्र गुप्ता, प्रदीप सिंह, डॉ. पूनम, आशीष मित्तल, दीप शिखा माहेश्वरी, डॉ. मधु भार्गव, मो. आरिफ खान, डॉ. अरुणिमा शर्मा, आचमन अवस्थी, गौरव, अक्षिता पांडेय, राहुल मिश्रा आदि ने कोरोना और ब्लैक फंगस से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने विस्तार में इन्हें जानकारी दी।
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लोगों में कोरोना का डर कम करना जरूरी 
अमेरिका से कोरोना वॉरियर अभियान का संयोजन कर रहे वेदांत गौड़ ने कहा कि कोरोना रोगियों के इलाज में मदद पहुंचाने के लिए चीन और हांगकांग से सामान मंगाया गया है। इसके साथ ही रोगियों के इलाज में मदद के लिए फंड इकट्ठा किया जा रहा है। इस वक्त जरूरी है कि लोगों में कोरोना का डर कम किया जाए।

टिप्स
- वैक्सीनेशन में दो-तीन बुखार, थकान रहना सामान्य बात है।
- कोरोना विजेता खुद को एक्टिव रखें, प्राणायाम-योग करते रहें।
- पांच मिनट पानी उबालने से खत्म हो जाता है फंगस।
- डायबिटिक अपना ब्लड शुगर लेवल हर हाल में सामान्य रखें।
- कोरोना ठीक होने के बाद हार्ट रेट बढ़े तो डॉक्टर को दिखाएं, जांच भी कराएं।
- कुछ दूर पैदल चलने के बाद ऑक्सीजन लेवल चेक कर स्थिति पता करते रहें।
- तली-भुनी चीजों और मिष्ठान का सेवन कम कर दें।
- कोरोना का इलाज शरीर ही करता है, दवाएं सपोर्ट देती हैं।
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