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कोरोना से हाहाकार: पहले इलाज और मौत के बाद अंतिम संस्कार को भटके, झकझोर देंगे ये मामले

Sat, 24 Apr 2021 12:18 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

मंधना स्थित अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद शव को बिना बॉडी कवर के सौंपकर एंबुलेंस चालक और परिजनों की जान खतरे में डाल दी गई। इसके बाद भगवतदास घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला।
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भगवतदास घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में बंद ताला व बाहर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संकट में इलाज से लेकर अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजों की मौत के बाद उनके परिजनों को अब अंतिम संस्कार के लिए भी भटकना पड़ रहा है। गुरुवार रात मंधना स्थित अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद शव को बिना बॉडी कवर के सौंपकर एंबुलेंस चालक और परिजनों की जान खतरे में डाल दी गई।
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इसके बाद भगवतदास घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। नतीजतन परिजन रातभर शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए भटकते रहे। बांदा के मरका निवासी संतोष सिंह ने बताया कि उनके 42 वर्षीय बड़े भाई की करीब चार दिन पहले तबीयत बिगड़ी।

उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। एंबुलेंस से सर्वोदयनगर स्थित कोविड अस्पताल पहुंचे, जहां जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। लेकिन, वहां भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें मंधना स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई।
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शव चार दिन बाद लेने के लिए बुलाया गया। जिलाधिकारी से शिकायत पर शव रात करीब 11 बजे बिना बॉडी कवर के सौंप दिया गया। एंबुलेंस में शव लेकर भगवतदास घाट पहुंचे तो विद्युत शवदाह गृह पर ताला मिला।
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घंटों इंतजार के बाद भी नहीं खुला तो भैरवघाट विद्युत शवदाह गृह पहुंचे। यहां 77 वेटिंग मिली। तड़के चार बजे अंतिम संस्कार हुआ। इसी तरह बांदा के ही अशोक कुमार सिंह भी अपने रिश्तेदार का शव लेकर अंतिम संस्कार कराने के लिए रातभर भटके और सुबह दाह संस्कार हो सका।

फतेहपुर में दलाल ने हड़प लिए 25 हजार रुपये  
दलाल आपदा के दौर में भी मरीजों और उनके परिजनों को लूटने में लगे हैं। संतोष के अनुसार वह अपने भाई को लेकर एंबुलेंस से फतेहपुर स्थित सरकारी अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल के गेट पर ही एक दलाल उनसे मिला और निजी अस्पताल में अच्छा इलाज दिलाने का झांसा देकर उनसे 25 हजार रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद पास में स्थित कृष्णा अस्पताल में भर्ती करा दिया। अस्पताल में रातभर में राहत न मिलने पर अपने मरीज को लेकर कानपुर आ गए।

रात 10 बजे तक आए शवों की ही अंत्येष्टि
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों विद्युत शवदाह गृह में सुबह आठ से दोपहर दो और दोपहर दो से रात 10 बजे तक दो शिफ्टों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। रात वाली शिफ्ट को निर्देश हैं कि रात 10 बजे तक जितने शव आएं, सभी का उसी रात अंतिम संस्कार किया जाए। उनका कहना है कि शव रात 10 बजे के बाद आया होगा। इसके चलते देरी संभव है।
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