भगवतदास घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में बंद ताला व बाहर खड़े लोग
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कोरोना संकट में इलाज से लेकर अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजों की मौत के बाद उनके परिजनों को अब अंतिम संस्कार के लिए भी भटकना पड़ रहा है। गुरुवार रात मंधना स्थित अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद शव को बिना बॉडी कवर के सौंपकर एंबुलेंस चालक और परिजनों की जान खतरे में डाल दी गई।
इसके बाद भगवतदास घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। नतीजतन परिजन रातभर शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए भटकते रहे। बांदा के मरका निवासी संतोष सिंह ने बताया कि उनके 42 वर्षीय बड़े भाई की करीब चार दिन पहले तबीयत बिगड़ी।
उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। एंबुलेंस से सर्वोदयनगर स्थित कोविड अस्पताल पहुंचे, जहां जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। लेकिन, वहां भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें मंधना स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई।
शव चार दिन बाद लेने के लिए बुलाया गया। जिलाधिकारी से शिकायत पर शव रात करीब 11 बजे बिना बॉडी कवर के सौंप दिया गया। एंबुलेंस में शव लेकर भगवतदास घाट पहुंचे तो विद्युत शवदाह गृह पर ताला मिला।