कोरोना के खौफ के चलते लोग मानसिक बीमारी का शिकार हो रहे हैं। लोगों को दिनरात कोरोना की चिंता सता रही है। चिकित्सा विज्ञान में इस तरह का डर कोविड एंजाइटी कहलाता है।
कोरोना के संक्रमण से बचे लोग इसके खौफ में ही बीमारी ओढ़ ले रहे हैं। शहर में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो बचाव के लाख जतन करने के बाद भी मानसिक बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। मानसिक विशेषज्ञों ने इस बीमारी को कोविड एंजाइटी का नाम दिया है।
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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऐसे रोगियों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि कुछ मानसिक रोग विशेषज्ञों के यहां हफ्तेभर तक की वेटिंग चल रही है। वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नति कुमार के मुताबिक, कोरोना काल में सामान्य दिनों की तुलना में रोगियों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है।
इनमें सबसे ज्यादा लोग कोविड एंजाइटी के शिकार हैं। इसके मरीज चिंता ज्यादा कर रहे हैं, जिससे 24 घंटे परेशान रहते हैं। उन्हें डर है कि कहीं उन्हें छींक, बुखार, खांसी न आ जाए। बच्चों, माता-पिता सहित अन्य परिजनों की भी चिंता है। ऐसे लोगों में हताशा भी होती है। यह समस्या 30 से 55 वर्ष के लोगों में ज्यादा देखी जा रही है।
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केस 1
पी रोड निवासी सतीश गुप्ता कोरोना काल की शुरुआत से ही घर से नहीं निकले। वह बार-बार हाथ धोते हैं। सफाई का जरूरत से ज्यादा ख्याल रखते हैं। बाहरी लोगों से मिलना-जुलना भी बंद कर दिया है। सोते समय भी मास्क नहीं उतारते। उन्हें बार-बार कोरोना के संक्रमण का डर सता रहा है। परिजनों के समझाने पर भी नहीं माने तो पत्नी ने मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह ली।
केस 2
किदवईनगर निवासी शिवराम अवस्थी को दिनरात कोरोना होने को चिंता सता रही है। डर लगता है कि कहीं उन्हें, पत्नी, बच्चों, माता-पिता को कोरोना न हो जाए। घर वालों ने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। हालत बिगड़ते देख परिजन उन्हें मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास ले गए।
केस 3
सर्वोदय नगर निवासी प्रमोद कुमार कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाने सहित अन्य प्रयास लगातार कर रहे हैं। इसके बाद भी बार-बार लगता है कि उन्हें कोरोना हो गया है। इससे वह परेशान रहते हैं। नियमित काढ़ा पी रहे हैं, बार-बार हाथ धोते हैं। तीन बार कोरोना जांच कराई पर रिपोर्ट निगेटिव आई। समझाने पर भी हालात में सुधार न होने पर परिजनों ने मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह ली।
युवाओं में कोविड फोबिया
उन्होंने बताया कि टीनएज से लेकर 25 साल तक के युवाओं में फोबिक एंजाइटी (कोविड फोबिया) के केस सामने आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को खुद में कोरोना के लक्षण महसूस होते हैं। हालांकि, वे यह मानते हैं कि ऐसा नहीं है, फिर भी परेशान रहते हैं। बार-बार कोरोना की जांच कराते हैं। खूब काढ़ा, गर्म पानी पी रहे हैं। बार-बार हाथ धोते या सैनिटाइज करते रहते हैं।
ऐसे लोग भी कम नहीं
डॉ. उन्नति ने बताया कि कोरोना काल में ऑब्सेसिव एंजाइटी के केस भी बढ़े हैं। घर से बाहर न निकलने, सफाई आदि का ध्यान रखने पर भी कोरोना का डर सताता है। मरीज सोते समय भी मास्क लगाए रहता है। डिप्रेशन के शिकार भी आ रहे हैं। उन्हें लगता है कि जीवन कैसे चलेगा? आत्महत्या जैसे बुरे ख्याल भी मन में आने लगे हैं।
इन वजहों से हो रहे बीमार
डॉ. उन्नति के मुताबिक, कोरोना का खौफ, संक्रमित होने का खतरा, तनाव, बेरोजगारी, शारीरिक स्वास्थ्य में कमी, सामाजिक जीवन पर कुप्रभाव आदि के चलते लोग इन मानसिक बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं।
बचाव के लिए यह करें
सकारात्मक सोच, नियमित दिनचर्या व व्यायाम, संतुलित पौष्टिक आहार, कोरोना से बचाव के उपाय अपनाएं, कोरोना संक्रमित मरीजों की मौतों का आंकड़े देखने के बजाय ठीक हो रहे लोगों से प्रेरित हों, नकारात्मक सोच छोड़ें या नजरंदाज करें, बातचीत में मनोरंजन के टॉपिक शामिल करना आदि।