जाजमऊ चंदन घाट पर होती कटान
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खाता संख्या 1356 और 1359 में वादी का नाम ही नहीं
फिर मामले के निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद मामले की जांच उन्हें सौंपी गई। जांच में पता चला कि 2003 में गंगा बैराज का संपर्क मार्ग बनने के चलते 12 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। बदले में सुषमा देवी और अभिनव को करीब 46 लाख रुपये जमीन का मुआवजा दिया गया। अब जब जांच हुई, तो पता खाता संख्या 1356 और 1359 में वादी का नाम ही नहीं था। जमीन सरकारी भूमि के रूप में रेत के नाम पर दर्ज थी।
जांच करने के लिए एसआईटी को भी लिखा
सरकारी दस्तावेजों में फर्जी तरीके से बिना किसी वरासत और रजिस्ट्री के आशीष नारायण का नाम जमीन पर दर्ज किया गया। आशीष की मृत्यु होने के बाद जमीन उनकी पत्नी सुषमा देवी और बेटे अभिनव कुमार के नाम पर दर्ज हो गई। मामले की जांच पूरी होने के बाद सहायक अभिलेख अधिकारी ने सभी के नाम हटाकर जमीन रेत खाते में दर्ज की गई। मामले की सही तरह से जांच करने के लिए एसआईटी को भी लिखा गया है।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह
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सरकारी जमीन रेत खाते में दर्ज की गई है। तत्कालीन समय में गलत तरीके से सरकारी जमीन पर लोगों के नाम दर्ज किया गया था। उस पर मुआवजा भी ले लिया था। अब मुआवजा वसूली की कार्रवाई होगी। -जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी