कानपुर के बाबूपुरवा में तीन तलाक के मामले में सीओ आलोक सिंह ने पीड़िता को कार्यालय बुला कर बयान दर्ज किए। उन्होेंने पूर्व विवेचना अधिकारी के तीन तलाक के कानून पर की गई टिप्पणी के संबंध में भी पूछताछ की। इसके बाद दोषियों के कोर्ट में मिलने का आश्वासन देकर पीड़िता को वापस भेज दिया।
बाबूपुरवा थाना क्षेत्र में नवंबर 2019 में दर्ज हुए तीन तलाक के बाद पीड़िता ने पति, सास, ससुर, देवर, दो नंदों और उनके पतियों के खिलाफ थाने में दहेज के लिए प्रताड़ित करने, फोन पर तीन तलाक देने समेत कई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पीड़िता के अनुसार उसे पता चला कि पुलिस ने ससुरालीजनों से सेटिंग कर पति को छोड़ सभी के नाम केस डायरी से हटा दिए। इसकी शिकायत उसने सीओ आलोक सिंह से की। मामला विवेचक और वर्तमान विवेचना अधिकारी सुजातगंज चौकी इंचार्ज पवन दुबे तक पहुंचा तो उनकी फोन पर बहस भी हुई।
शुक्रवार को सीओ ने पीड़िता के बयान दर्ज किए। पीड़िता के अनुसार जब उसने केस डायरी से पति को छोड़कर अन्य छह आरोपियों के नाम हटाने के बार में पूछा तो इसे गोपनीय बता कहकर टाल दिया गया। इस संबंध में सीओ आलोक गुप्ता ने बताया कि पूर्व विवेचक के तीन तलाक कानून पर की गई टिप्पणी की जांच की जा रही है। केस डायरी से नाम हटवाने के सवाल पर दोषियों के जेल जाने की बात कह कर टाल दिया।