कानपुर में एक तरफ सरकार जिले में स्वच्छ भारत अभियान चलाकर गांवों को चकाचक करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं, जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते गांवों में गंदगी के ढेर लगे हैं। नालियों में कूड़ा-कचरा भरा है। मुख्य मार्गों पर जलभराव होने के कारण लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। पहली बारिश के बाद अमर उजाला की टीम ने मॉडल गांवों की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। जिले की सभी 590 ग्राम पंचायतें चार वर्ष पहले मॉडल घोषित की जा चुकी हैं।
ग्राम पंचायतों में सिर्फ सफाई कार्यों की बात करें तो 15वें वित्त की धनराशि से बीते वित्तीय वर्ष में करीब 64 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसी वित्त के तहत नाली निर्माण और सफाई कार्यों का भुगतान होता है। इतनी धनराशि खर्च होने के बाद भी जिले के गांवों की हालत नहीं सुधर पाई। जिले में 900 से अधिक सफाई कर्मी तैनात हैं, लेकिन इनमें आधे कर्मी अफसरों के यहां नौकरी कर रहे हैं। बचे कर्मी प्रत्येक दिन गांव जाते ही नहीं। जिम्मेदार भी आंख बंद कर नौकरी चला रहे हैं।
नाला बजबजा रहा, शौचालय पर ताला
बिल्हौर ब्लाक के इलियासपुर ग्राम पंचायत के सामने बहने वाला नाला और नालियां गंदगी से पटी हैं। कुछ दूरी पर बने सामुदायिक शौचालय पर ताला लगा है। बीते चार माह से नालियों की सफाई तक नहीं हुई। आसपास के लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो रहा है। यही हालात कन्नौज जनपदीय सीमा स्थित गजना गांव की हैं। नालियों की सफाई न होने से गंदगी की भरमार है। बारिश होते ही नालियों का पानी सड़क पर बहने लगा। जगह-जगह जलभराव है।
पंचायत भवन के सामने जमा पानी व गंदगी
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कीचड़ से भरी गलियों से निकलना मुश्किल
ब्लॉक घाटमपुर की ग्राम पंचायत सजेती में कीचड़ से भरी गलियों और जाम नालियों के बीच से गुजरना मुश्किल है। सफाई कर्मी छह माह से गांव में सफाई करने ही नहीं पहुंचा। गांव के सुनील व पूती ने बताया कि नालियां चोक रहती हैं आम रास्तों पर मकानों का गंदा पानी भरा रहता है।
बेरीखेड़ा गांव में नाली तक नहीं, पंचायत भवन के आसपास गंदगी के ढेर
भीतरगांव ब्लॉक की बेरीखेड़ा गांव में नाली न होने से बारिश और घरों का पानी गलियों में भरता है। बारिश में गली में पूरा कीचड़ भर जाता है। ग्राम पंचायत भवन दलदल और गोबर के ढेरों से घिरा है। बगल में बने सुलभ शौचालय भी गंदगी से पटा पड़ा है। न तो वहां सचिव आते हैं और न ही वहां कोई बैठने जाता है। इसके साथ ही पालपुर गांव नदी किनारे बसा है। गांव की गलियां और नालियों की सफाई कोई करने नहीं आता।
बारिश से गलियों में भरा पानी, निकलना मुश्किल
विकास खंड पतारा के ग्राम पंचायत बरनाव गांव की नालियां पूरी तरह से चोक हैं। गलियों में बारिश के जलभराव से ग्रामीणों को काफी परेशान हो रही है। ग्रामीण सूर्यदेव व रामचंद्र निषाद ने बताया कि गांव में सफाई कर्मचारी नहीं आते हैं| गंदगी फैलने से संक्रामक बीमारियां फैलने का डर सता रहा है। नालियों की सफाई कभी नहीं होती।
जिन गांवों में नालियां नहीं बनी उनकी जांच होगी। जिन गांवों में अभी तक नालियों की सफाई नहीं की गई वहां पर रोस्टर बनाकर सफाई कराई जाएगी। -दीक्षा जैन, सीडीओ