कोरोना पीक (ऊंचाई) के नजदीक है और शासन की हरी झंडी के बाद सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी चालू कर दी गई है। इसके साथ ही निजी चिकित्सकों को भी अपनी क्लीनिक चालू करने की अनुमति मिल गई है। माना जा रहा है कि गैर कोरोना रोगियों के उपचार की व्यवस्था बिगड़ने के चलते शासन को यह फैसला लेना पड़ा। अब बड़ा सवाल यह है कि कोरोना संक्रमण के फैलाव को कैसे रोका जाएगा।
शासन से कई बार गाइड लाइन जारी हो चुकी है कि 15 से 30 जून तक कोरोना पीक पर रहेगा। इस बीच प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन के आदेश पर बुधवार को नगर की सभी सीएचसी, पीएचसी खुल गईं। हालांकि कोरोना संक्रमण को लेकर प्रोटोकॉल भी जारी किया गया है लेकिन कितना पालन हो पाता है, यह देखने वाली बात है।
ओपीडी में आने पर हर व्यक्ति को मास्क लगाना जरूरी होगा। सभी की स्क्रीनिंग होगी। जुकाम, बुखार, खांसी के रोगियों की अलग व्यवस्था की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मास्क और ग्लव्ज अनिवार्य हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के रोगियों को एक महीने की दवा दी जाएगी, जिससे वे बार-बार न आएं। ओपीडी कक्ष के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। भीड़ अधिक होने पर कई पंजीकरण काउंटर बनाए जाएंगे। सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने बताया कि शहर में 40 प्राथमिक और 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य ओपीडी सुविधा मिलेगी। सभी को गाइड लाइन का पालन करना होगा।
निजी क्लीनिक में जहां एक या दो डॉक्टर बैठते हैं, वहां के लिए शासन के निर्देश हैं कि एक घंटे में चार-पांच रोगी ही देखें। कर्मचारियों को मास्क, ग्लव्ज, पीपीई किट की व्यवस्था कराएं। बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की उचित व्यवस्था के साथ पैरा मेडिकल स्टाफ को कोविड-19 से संबंधित प्रोटोकॉल तथा इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल प्रशिक्षण प्राप्त हो। रोगी के सहयोगी के रूप में 60 साल से अधिक आयु के लोगों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अनुमति नहीं दी जाएगी। निजी क्लीनिकों में कोविड से बचाव के लिए जागरुकता सामग्री प्रस्तुत की जाए।