कानपुर। जीआरपी को बुधवार को अग्नि और भूकंपरोधी नई बैरक की सौगात मिल गई। कानपुर सेंट्रल स्टेशन के कैंट साइड स्थित जीआरपी लाइन परिसर में बनी इस प्री-फैब्रिकेटेड बैरक का लोकार्पण बुधवार को रेलवे पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक प्रकाश डी ने किया। इस दौरान उन्होंने महाकुंभ में उत्कृष्ट सेवा देने वाले 11 हेड कांस्टेबल सहित 48 जीआरपी जवानों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया।
सड़क मार्ग से रेलवे एडीजी जाजमऊ पुल पहुंचे जहां जीआरपी अधिकारियों ने उनकी आगवानी की। कानपुर सेंट्रल स्टेशन की जीआरपी लाइन पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद विधि-विधान से पूजन कर एडीजी ने फीता काटकर नई बैरक का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इसका निर्माण उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम ने 40 लाख की लागत से बहुत ही कम समय में कराया है। इस फैब्रिकेटेड बैरक से रेलवे के पुलिसकर्मियों को रहने के लिए शौचालय, बिजली और पानी सहित सभी सुविधाएं दी गई हैं। इसमें एक साथ 30 पुलिसकर्मी ठहर सकते हैं। यह प्री-फैब्रिकेटेड बैरक जवानों की सुरक्षा व उनकी सुविधा को देखते हुए बनाई गई है। इसका निर्माण स्टील फ्रेम, कंक्रीट, फाइबर, सीमेंट बोर्ड से किया गया है। इस अवसर पर डीआईजी पीएसी अतुल शर्मा, आईजी एन कोलांची, असिस्टेंट कमांडेंट आरपीएफ विवेक शर्मा, 37वीं बटालियन पीएसी के कमांडेंट बजरंग बली चौरसिया, सीओ जीआरपी दुष्यंत कुमार सिंह, आरपीएफ प्रभारी एसएन पाटीदार, जीआरपी प्रभारी निरीक्षक ओमनारायण सिंह, कानपुर सेंट्रल स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक अवधेश द्विवेदी आदि अधिकारी भी मौजूद रहे।
हाल के दिनों में पटरी पर संदिग्ध वस्तुएं मिलने के मामले में एडीजी ने कहा कि अधिकतर मामलों का पर्दाफाश किया गया है। इतने बड़े रेल नेटवर्क में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रेल मित्र बनाए जा रहे हैं। इनके जरिए जीआरपी और आरपीएफ जवान रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वालों से जुड़े रहते हैं और कोई सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। एडीजी ने बताया कि यूपी में करीब 16 हजार किमी रेल पटरी है। एक दिन में करीब 3050 ट्रेनें दौड़ती हैं जिनसे प्रतिदिन करीब 50 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं।
ये हुए सम्मानित
शिवबाबू यादव, संदीप कुमार तिवारी, मोहित कनौजिया, कृष्णा प्रसाद गौड़, शहजाद हैदर, नितेश कुमार राय, अतुल कुमार बिंद, देवकी नंदन, अमित, रूपेंद्र सिंह चौहान, मुकेश यादव आदि।