फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: 12 साल से चल रहा खपरैलनुमा कमरे का मुकदमा, किरायेदार की याचिका पर फंसे हैं अपर जिला जज, पढ़ें पूरा मामला

Sun, 27 Apr 2025 09:13 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: एक पक्ष शशिकला निर्मित भवन की स्वामिनी नहीं हैं, न ही उसने खपरैल क्रय किया है और न ही निर्मित कराया है। मुन्नी देवी ने कहा कि उसे शशिकला द्वारा भेजा गया नोटिस मिला ही नहीं और न ही उसने उसका कोई जवाब अपने अधिवक्ता के माध्यम से भेजा।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Additional District Judge Case: कानपुर के शास्त्री नगर में एक खपरैलनुमा कमरे और कुछ खुली जमीन को लेकर पिछले 12 साल से दीवानी का मुकदमा चल रहा है। भवन में रहने वाली खुद को मकान मालिक और विपक्षी को किरायेदार बताकर मकान से बेदखल करना चाहती है, तो विपक्षी वादिनी को मकान मालिक मानने से ही इन्कार कर रही है।

विज्ञापन

मकान मालकिन ने किरायेदार के खिलाफ वाद दाखिल किया, जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। इस पर किरायेदार ने आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल की। इस याचिका की सुनवाई तत्कालीन अपर जिला जज 16 डॉ. अमित वर्मा की अदालत में हुई थी। इसी याचिका में पारित आदेश को लेकर हाईकोर्ट ने अपर जिला जज पर सख्त टिप्पणी की है।

29 फरवरी 2024 को पारित हुआ था आदेश
वर्तमान में डॉ. अमित वर्मा अपर जिला जज 25 हैं, जो विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट कार्यभार संभाल रहे हैं। शास्त्रीनगर स्थित भवन संख्या 121/562 में रहने वाली शशिकला पांडेय और मुन्नी देवी (65) के बीच मकान का विवाद चल रहा है। द्वितीय अपर लघुवाद न्यायाधीश ने शशिकला पांडेय बनाम मुन्नी देवी के दीवानी वाद में 29 फरवरी 2024 को आदेश और डिक्री पारित की थी।

शशिकला भवन सिर्फ खुली जमीन की स्वामिनी है
इसके खिलाफ मुन्नी देवी ने रिवीजन याचिका दाखिल की थी। याचिका में मुन्नी देवी का कहना था कि विवादित संपत्ति जमीन है न कि भवन। वहां कोई भी निर्माण नहीं है, इसलिए उन्हें किरायेदार नहीं कहा जा सकता। अवर न्यायालय की ओर से विवादित संपत्ति में जमीन को मकान मानकर मुकदमा तय कर दिया गया है। विक्रय पत्र के आधार पर शशिकला भवन की स्वामिनी नहीं हैं, बल्कि सिर्फ खुली जमीन की स्वामिनी हैं।

भेजा गया नोटिस मिला ही नहीं
दोनों के बीच भवन स्वामी और किरायेदार के संबंध नहीं हैं। शशिकला निर्मित भवन की स्वामिनी नहीं हैं, न ही उसने खपरैल क्रय किया है और न ही निर्मित कराया है। मुन्नी देवी ने कहा कि उसे शशिकला द्वारा भेजा गया नोटिस मिला ही नहीं और न ही उसने उसका कोई जवाब अपने अधिवक्ता के माध्यम से भेजा। लेकिन, अवर न्यायालय ने सिर्फ वादिनी के कहने के आधार पर नोटिस भेजना।

खपरैल की स्वामिनी नहीं है शशिकला
उसका प्राप्त होना और उसका जवाब दिया जाना स्वीकार कर लिया। मुन्नीदेवी का कहना है कि वर्ष 1980 में मूल भवन स्वामी बच्चा सेठ से मात्र खुली भूमि किराये पर लेकर अपने खुद के धन से निर्माण कराया। शशिकला भवन खपरैल की स्वामिनी नहीं है और उसने भूमि के साथ निर्मित भाग क्रय नहीं किया है और उक्त निर्मित भाग स्वयं मुन्नीदेवी का है।

मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न कर रही है
वहीं, विपक्षी शशिकला का कहना था कि मुन्नीदेवी ने किरायेदारी स्वीकार कर ली, तो उसे साबित करने का भार वादी मुकदमा पर नहीं रह जाता है। मुन्नीदेवी का खुद का मकान है, जिसे वह ऊंचे किराये पर उठाकर लाभ ले रही है और मेरे मकान में 70 रुपये महीने के किराये पर रहकर मेरा मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न कर रही है। इसके पहले भी एक रिवीजन याचिका दाखिल की गई थी।
विज्ञापन

याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती
जो पांच हजार रुपये हर्जे पर खारिज हो गई थी, लेकिन हर्जे की रकम आज तक नहीं दी गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद तत्कालीन अपर जिला जज डॉ.अमित वर्मा ने अपने सात नवंबर 2024 के आदेश में बिना कोई कारण स्पष्ट किए सीधे यह निष्कर्ष लिख दिया था कि आदेश में कोई विधिक त्रुटि नहीं है। इसलिए याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें