एडीजीसी कैलाश शुक्ला व अजय प्रकाश सिंह ने बताया कि मुकदमे में एसआई घनश्याम यादव की गवाही चल रही है लेकिन माल मुकदमा कोर्ट में न आने के कारण जिरह पूरी नहीं हो पा रही। कोर्ट ने रिपोर्ट मंगाई तो गोलमोल रिपोर्ट दी गई। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए माल के मालखाने में जमा होने से गायब होने तक की निरीक्षण रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए किस वर्ष, किस माह, किस तिथि को मूर्ति गायब हुई। इसका पूरा विवरण मांगा है। पुलिस कमिशभनर को पत्र भेजकर अपने स्तर से जांच कर 10 अक्टूबर से पहले रिपोर्ट कोर्ट भेजने को कहा है।
कोर्ट की टिप्पणी, अष्टधातु की मूर्ति हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अष्टधातु की मूर्ति हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक भी है। मामला वर्ष 2013 का है। उस समय मूर्ति की कीमत ढाई करोड़ थी। वर्तमान कीमत कई गुना बढ़ गई होगी। तत्कालीन मालखाना मोहर्रिर, थाना प्रभारी व उच्चाधिकारियों ने ढाई करोड़ की अष्टधातु की मूर्ति को जानबूझकर गायब कर दिया। जिले के वरिष्ठ पुलिस अफसरों व थाना प्रभारी द्वारा समय-समय पर मालखाने का निरीक्षण कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। इसके बावजूद पुलिस अफसरों को मूर्ति थाने से गायब होने की जानकारी न होना भी संदेह पैदा करता है।
वर्ष 2018 से है अफसरों को जानकारी
बर्रा थाने से आई रिपोर्ट में कहा गया कि 13 फरवरी 2014 को हेड कांस्टेबल बांकेलाल वर्मा की मौत के बाद 14 फरवरी को हेड कांस्टेबल ग्रीश चंद यादव को मालखाने का चार्ज सौंपा गया। 27 जून 2018 को ब्रेन हैमरेज से ग्रीश की मौत हो गई थी। इसके बाद माल हस्तांतरण के लिए एसीएम प्रथम के नेतृत्व में कमेटी बनी और मालखाना में रखे माल का आदान-प्रदान किया गया लेकिन इस दौरान न तो अष्टधातु की मूर्ति दी गई और न ही मालखाना रजिस्टर। मालखाने से काफी माल गायब होने पर कमेटी द्वारा थाने में एक मुकदमा भी दर्ज कराया गया था जिसकी विवेचना अभी जारी है।