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UP: ट्रैक पर पड़े रहे बाप-बेटी के शव, कार में थे मोबाइल और पर्स, फिर भी शिनाख्त नहीं करा पाई पुलिस, पढ़ें मामला

Tue, 24 Feb 2026 06:20 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: उन्नाव में रेलवे ट्रैक पर पिता-पुत्री के शव मिलने के बाद पुलिस चार घंटे तक नेटवर्क न आने का बहाना बनाकर शिनाख्त टालती रही, जबकि पास खड़ी कार और मृतक के पास मौजूद चाबी से पहचान तुरंत संभव थी।
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घटनास्थल से 200 मीटर दूर खड़ी मिली कार - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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चालान और अपराधियों को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस वाहनों के नंबर से उनकी कुंडली निकाल लेती है लेकिन उन्नाव पुलिस सहजनी रेलवे क्राॅसिंग के पास ट्रैक पर मिले शवों की करीब चार घंटे तक दोनों की शिनाख्त न करा पाई। कार में मोबाइल दिख रहे थे, शव की कमर में चाबी थी। फिर भी पुलिस ने चाबी निकालकर लाॅक नहीं खोला। वहीं, 5 जी इंटरनेट के दौर में नेटवर्क न आने का बहाना बनाती रही।

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कानपुर लखनऊ डाउन ट्रैक के खंभा नंबर 62\28 और 62\30 के बीच सोमवार रात करीब नाै बजे करीब 45 वर्षीय व्यक्ति और 14 वर्षीय किशोरी का शव मिला था। दोनों के शव ट्रैक पर क्षत-विक्षत पड़े थे। शव पड़े होने की सूचना गेटमैन ने जीआरपी को दी थी। युवक की कमर में कार की चाबी का छल्ला लगा था। घटनास्थल के पास एक कानपुर के नंबर वाली कार लावारिस हालत में खड़ी मिली थी।

चाबी से कार का गेट खोलने का प्रयास नहीं किया
अंदेशा था कि कार की चाबी ही मृतक की कमर में लगी थी। कार के अंदर झांक कर देखने से उसमें दोनों के पर्स और मोबाइल भी पड़े मिल गए थे। हालांकि पुलिस ने चाबी से कार का गेट खोलने का प्रयास नहीं किया। न ही पुलिस एप के माध्यम से कार के मालिक का नाम पता और घर की जानकारी जुटा पाई, जबकि एप पर दिख रही कार के मालिक का नाम यश गुप्ता और कानपुर के हरबंश मोहाल कछियाना इलाके के नाम गाड़ी पंजीकृत होने की जानकारी नहीं जुटा पाई।
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न एप चला न साहब के कदम
गंगाघाट थाने की पुलिस के दरोगा का कहना था कि एप नहीं चल रहा है वह मौके पर हैं। हालांकि सबसे खास बात यह रही कि न तो चार घंटे तक पुलिस के एप में नेटवर्क आया और न ही पुलिस वालों ने वहां आगे पीछे हटकर किसी और जगह से नेटवर्क लेकर एप चलवाकर देखने की कोशिश की। गंगाघाट के एसएसआई दिलीप प्रजापति ने बताया कि एप नहीं चल रहा है, इसलिए शव की शिनाख्त नहीं करा पा रहे हैं जबकि घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि पुलिस, जीआरपी दोनों एक-दूसरे पर पंचनामे की कार्रवाई टाल रहे थे।
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