कानपुर में रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर हैलट में ब्लैक फंगस का अलग से वार्ड बना दिया गया है। नेत्र रोग विभाग के वार्ड नंबर नौ को इस वार्ड में तब्दील किया गया है। इलाज करने के लिए नेत्र, न्यूरो, ईएनटी, प्लास्टिक सर्जरी आदि विशेषज्ञताओं के विशेषज्ञों की टीम गठित कर दी गई है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि ब्लैक फंगस की जांच के लिए अलग से माइक्रोस्कोपिक लैब बना दी गई है। इसमें ब्लैक फंगस की जांच की जाएगी। रविवार से इसमें जांचें होने लगेंगी। इसके अलावा ब्योप्सी की जांच पैथोलॉजी में की जाएगी।
सौ इंजेक्शन मंगवाए
ब्लैक फंगस की दवा एमफोटेरेसिन-बी के 100 इंजेक्शन के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने कंपनी को आर्डर दिया है। हैलट में दवा न होने की वजह से रोगियों के इलाज में दिक्कत आ रही है। प्राचार्य ने दवा उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्र लिखा है।
क्या है ब्लैक फंगस
ये वायरस लोगों की आंखों पर भी वार कर रहा है। जो लोग कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके हैं उनको आंखों से जुड़ी कई परेशानियां देखने को मिल रही है। यहां तक कि कई लोग तो ऐसे हैं, जिनको अपनी आंखें तक गंवानी पड़ रही है। इस इंफेक्शन को म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के नाम से जाना जा रहा है।