गंदा नाला में बाॅयोरेमेडिएशन के नाम पर खानापूरी
- फोटो : amar ujala
बिना शोधन के पांडु नदी में जा रहा था गंदा पानी
इसमें बायोरेमेडिएशन के नाम पर हो रही खानापूरी का खुलासा हुआ। शास्त्री चौक चौराहे के पास रखा गंदा नाला टैंक नंबर-एक खाली मिला जिसमें रसायन तो दूर पानी भी नहीं था। तली में सूखी काई की पपड़ी उखड़ रही थी जिससे कई दिन से रसायन न डाले जाने का संकेत मिला। केडीएमए स्कूल के आगे पुलिया के पास रखा टैंक नंबर-तीन भी सूखा मिला, जहां से गंदा पानी बिना शोधन के पांडु नदी में जा रहा था।
गंदा नाला में बाॅयोरेमेडिएशन के नाम पर खानापूरी
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लगे टैंकों को भरने का कार्य तीन कर्मियों के जिम्मे
बायोग्रीन कंपनी ने शुरुआत में 25 टैंकों में रसायन भरने के लिए 12 कर्मी लगाए थे। मार्च 2026 में इनमें से आठ कर्मियों को हटा दिया गया। अब दक्षिणी क्षेत्र से पांडु नदी में गिर रहे नालों के किनारे लगे टैंकों को भरने का कार्य एक ही कर्मचारी कर रहा है। इसी तरह गंगा नदी में गिर रहे नालों के किनारे लगे टैंकों को भरने का कार्य तीन कर्मियों के जिम्मे है।
बायोरेमेडिएशन के नाम पर की जा रही गड़बड़ी की रेंडम चेकिंग कराऊंगा। रिपोर्ट के आधार पर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी अमर उजाला में बायोरेमेडिएशन में कमियां उजागर होने पर बायोग्रीन कंपनी पर कार्रवाई की जा चुकी है। -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त