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Kanpur: कपड़ा हो या वाहन…बिक्री की रफ्तार थमने से कारोबारी परेशान, बोले- ये मंदी भी हो सकती है, पढ़ें रिपोर्ट

Fri, 27 Jun 2025 11:10 AM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कारोबारियों का कहना है कि मार्च, अप्रैल, मई और जून उत्पादन का पीक समय होता है। इस बार मांग बेहद कमजोर है। लग्जरी उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना-चांदी के अलावा खानपान के सामान की भी मांग घट गई है।
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कानपुर कपड़ा मार्केट - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर शहर के बाजार मंदी जैसी आहट सुनाई दे रही है। हालांकि, यह मंदी है या नहीं, अभी यह स्पष्ट नहीं है। लगभग हर तरह के उत्पाद की बिक्री में गिरावट आई है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अशांति, सहालग का खत्म होना और एक नए नियम को भी इसका कारण माना जा रहा है। सबसे बुरी मार कपड़ा बाजार पर पड़ी है। बाजार के सूत्रों के अनुसार शहर का कपड़ा कारोबार 100 करोड़ रुपये से सिमट कर 10 करोड़ रुपये प्रतिदिन ही रह गया है। सूरत की 50 प्रतिशत मिलों में उत्पादन कम या ठप हो गया है।

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वाहनों की बिक्री धीमी पड़ गई है। सोने-चांदी से आसमान छूते दामों के चलते सराफा बाजार भी ठंडा पड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य उत्पादों की बिक्री भी इससे प्रभावित बताई जा रही है। कुछ नए नियमों के कारण बाजार में नकदी का संकट बताया जा रहा है। अब कारोबारी त्योहारी सीजन से की आस लगाए बैठे हैं। शहर के जनरलगंज, नौघड़ा, रेशमगली, बजाजा, धनकुट्टी में थोक कपड़ा बाजार है। यहां कपड़ों की तीन हजार से ज्यादा दुकानें और शोरूम हैं।

मूलगंज इलेक्ट्रॉनिक मार्केट (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
पहले कभी इतनी गिरावट नहीं देखी गई
शहर में मुंबई, इचलकरंजी, सूरत, जयपुर, भीलवाड़ा, कोलकाता, अहमदाबाद, बंगलूरू, पंजाब समेत दक्षिण के राज्यों से माल आता है। प्रतिदिन 100 करोड़ का कारोबार होता है। लेकिन, इन दिनों यह 10 प्रतिशत तक ही रह गया है। हालांकि, इसकी एक वजह सहालग खत्म होना भी माना जा रहा है, लेकिन सहालग खत्म होने से पहले कभी इतनी गिरावट नहीं देखी गई थी। यही हाल ऑटोमोबाइल क्षेत्र का है। जून के दूसरे सप्ताह के बाद से इसमें अचानक गिरावट देखी जा रही है।

कानपुर किराना मार्केट - फोटो : amar ujala
भुगतान संबंधी नए नियम का भी असर
सामान्य दिनों में शहर में 1000 बाइक, स्कूटी, ई-स्कूटी की बुकिंग होती थी, जो अब घटकर 400 रह गई है। इसी तरह 200-300 चार पहिया वाहन बुक होते थे, जिनकी संख्या घटकर 100-120 रह गई है। सोने-चांदी के दाम नए रिकार्ड पर हैं। इससे बाजार में सन्नाटा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और युद्ध के के आलावा वित्त मंत्रालय ने एमएसएमई (सूक्ष्म और लघु उद्यम) के लिए भुगतान संबंधी नए नियम का भी बाजार पर असर पड़ा है।

गुमटी बाजार,कानपुर - फोटो : amar ujala
कारोबारियों की फंस गई है पूंजी
नए नियमों के तहत एमएसएमई व्यापारियों के साथ व्यापार करने वाली किसी भी कंपनी को 45 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। लिखित समझौता न होने पर भुगतान 15 दिनों के भीतर करने की बाध्यता है। भुगतान न करने पर उसे संबंधित कारोबारी का लाभ मानकर आयकर स्लैब में जोड़ने का प्रावधान है। इस नियम का भी कारोबार पर गहरा असर है। कारोबारियों की पूंजी फंस गई है।

रूमित सिंह सागरी - फोटो : amar ujala
मौजूदा समय में कपड़ा बाजार में ग्राहक नहीं है। केवल 10 प्रतिशत व्यापार ही बचा है। सूरत-अहमदाबाद की कपड़ा मिलों का उत्पादन 50 प्रतिशत तक घट गया है। एमएसएमई के नियम से कपड़ा कारोबारियों की पूंजी फंसी हुई है। भुगतान के लिए अब व्यापारी एक-दूसरे पर एफआईआर तक दर्ज करवा रहे हैं। अगस्त में त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद है।  -रूमित सिंह सागरी, निदेशक, कानपुर कपड़ा कमेटी

पंकज अरोड़ा - फोटो : amar ujala
भाव में तेजी के चलते सोना-चांदी का व्यापार घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। बड़े-बड़े शोरूमों में बोहनी देर शाम तक हो रही है। कारोबारियों को एफडी तुड़वाकर नकदी संकट दूर करना पड़ रहा है। नए ग्राहक बाजार में बेहद सीमित हैं। पुराने गहने बेचने वाले ही बाजार आ रहे हैं, जिन्हें भुगतान के लिए लंबा समय दिया जा रहा है।  -पंकज अरोड़ा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन

सुमन कपूर - फोटो : amar ujala
बाजार में अचानक बाइकों, चार पहिया वाहनों की मांग घट गई है। इसके स्पष्ट कारण अब तक सामने नहीं आए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग देशों में चल रहे तनाव का भी असर हो सकता है। एडवांस बुकिंग बेहद कम हो गई है। हर क्षेत्र के वाहनों पर असर देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।  -सुमन कपूर, सीईओ, टाटा मोटर्स

मनीष कोहली - फोटो : amar ujala
सहालग खत्म हो गई है। इस बार बरसात ने जून में ही दस्तक दे दी। पिछले साल जुलाई महीने में बरसात शुरू हुई थी। इसका असर इलेक्ट्रानिक्स आइटम के बाजार है। 75 प्रतिशत व्यापार घट गया है। टीवी, फ्रिज, एसी या अन्य आइटमों की खरीदारी बड़ी जरूरत पर ही लोग कर रहे हैं।  -मनीष कोहली, इलेक्ट्रानिक्स व्यापारी

राजेश कुमार शुक्ला - फोटो : amar ujala
खानपान से जुड़े उत्पादों की मांग अचानक कम हो गई है। खाद्य तेल, बिस्कुट यहां तक कि ब्रेड की बिक्री में भी 10-15 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। गिरावट के कारण समझ नहीं आ रहे हैं। लोगों ने अपनी जरूरत के सामान तक की कटौती करनी शुरू कर दी है। पहले जो पांच किलो दाल ले जाता था, वह ढाई किलो ले जा रहा है। हालांकि भाव कम हुए हैं।  -राजेश कुमार शुक्ला, किराना व्यापारी

सुनील वैश्य - फोटो : amar ujala
मार्च, अप्रैल, मई और जून उत्पादन का पीक समय होता है। इस बार मांग बेहद कमजोर है। लग्जरी उत्पादों के अलावा खानपान के सामान की भी तक में मांग घट गई है। उद्यमी समझ रहे हैं कि वैश्विक युद्धों का व्यापक असर उद्योग पर पड़ा है। बरसात आने पर भी उद्योगों में मांग घट जाती है। आगामी कुछ माह उद्योग जगत के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे। ये मंदी भी हो सकती है।  -सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए

कानपुर रोड पर सजा कार बाजार - फोटो : amar ujala

एक नजर में बाजार

  • कपड़ा बाजार: पिछले साल जून में कारोबारी गतिविधि 50-60 प्रतिशत तक थी। मौजूदा समय में कपड़ा बाजार में ग्राहक नहीं है। केवल 5-10 प्रतिशत ही व्यापार है।
  • ऑटोमोबाइल बाजार: ऑटोमोबाइल में वाहनों की एडवांस बुकिंग नहीं हो रही। पिछले साल इस अवधि में 80-90 प्रतिशत तक व्यापार था। अब घटकर 35-40 प्रतिशत ही रह गया है।
  • सोना-चांदी: सोना-चांदी में पांच प्रतिशत ही व्यापार रह गया है। शहर में सामान्य दिनों में 35 किलो सोना और दो हजार क्विंटल चांदी बिकती थी। पिछले साल जून में कारोबार 70-80 प्रतिशत के स्तर पर था।
  • तेजी से बिकने वाले उत्पाद (एफएमसीजी): पिछले साल इस क्षेत्र में कोई गिरावट नहीं थी। मांग और बेहतर हुई थी लेकिन इस बार इस क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज की गई है ये गिरावट 5-10 प्रतिशत है।
  • इलेक्ट्रानिक्स बाजार: लग्जरी उत्पादों में शुमार इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों की मांग तेजी से घटी है। पिछले साल गर्मी देर से पड़ने के कारण जून में इनकी मांग बहुत अच्छी थी। 80-90 प्रतिशत कारोबार था। जो अब 25 प्रतिशत रह गया है।

बाजार में भारी गिरावट (प्रतीकात्मक) - फोटो : एएनआई
मांग घटने के कारण जो उद्यमी समझ पा रहे हैं
  • वैश्विक युद्धों के चलते लोगों में जोखिम न उठाने की मानसिकता।
  • जुलाई में स्कूल-कॉलेजों के खुलने से दी जाने वाली फीस का बोझ।
  • बाजार में नकदी का संकट, लोग जमा पूंजी खर्च करने से बच रहे।

कानपुर प्राॅपर्टी मार्केट - फोटो : amar ujala
रीयल एस्टेट कारोबार में गिरावट, छोटे फ्लैटों के खरीदार घटे
विश्व युद्ध की आशंका और कई कारोबारों में मंदी का असर रीयल एस्टेट पर भी पड़ा है। छोटे फ्लैटों के ग्राहक 25-30 फीसदी घट गए हैं। तमाम छोटे बिल्डरों को ग्राहक ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने नए प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिए हैं। बड़े और लक्जरी फ्लैट्स के खरीदारों में भी मामूली गिरावट आई है। हालांकि बिल्डर इसे चौमास का असर मान रहे हैं और अगस्त से त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ने की संभावना जता रहे हैं। रीयल एस्टेट कारोबारी विश्वनाथ गुप्ता ने बताया कि चौमास, घूमने-फिरने का मौसम, बच्चों के एडमिशन आदि वजहों से इस कारोबार में थोड़ी गिरावट आई है। इस मौसम में लोगों की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। इस मौसम के बाद कारोबार में फिर उछाल आएगा। बिल्डर्स एसोसिएशन के पूर्व सचिव अनूप अस्थाना ने बताया कि स्वरूपनगर, तिलकनगर एरिया में फ्लैटों की डिमांड है।
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फ्लैट - फोटो : अमर उजाला
ढाई से तीन हजार फ्लैट पड़े हैं खाली
यहां निवेशक की बजाय यूजर्स आ रहे हैं। इसलिए इस क्षेत्र में तेजी मंदी का फर्क नहीं पड़ता। बिल्डर महेश चंद्र जैन ने कोई खास फर्क न पड़ने की बात कही। मध्य वर्ग के लिए फ्लैट बनाने वाले बिल्डर संजय अरोड़ा ने बताया कि इस समय व्यापार का असर रीयल एस्टेट कारोबार पर पड़ रहा है। तमाम लोग मकान खरीदना टाल रहे हैं। कुछ लोग तर्क दे रहे हैं कि जब एक्सट्रा पैसा होगा, तब खरीदेंगे। शहर में ढाई से तीन हजार फ्लैट खाली पड़े हैं। पहले रविवार को ज्यादा खरीदार आते थे, अब कम हो गए हैं। पांडुनगर, काकादेव, आजादनगर, मैनावती मार्ग में खरीदार घट गए हैं। अमित खत्री ने बताया कि रीयल एस्टेट कारोबार काफी घट गया है। त्योहारी सीजन में इजाफा होने की उम्मीद है।
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