बैंकिंग ही नहीं होगी, तो व्यापारी क्या करेगा
इसलिए खातों में पर्याप्त बैलेंस रखें। तीन अक्तूबर को अपने व्यापारियों को अलग-अलग बैंकों के 13 लाख रकम के चेक दिए थे, जो अब तक क्लीयर नहीं हो सके हैं। बैंक मैनेजर कोई उचित जवाब नही दे रहे हैं। बैंक शाखा में अधिकारी अपने से ऊपर वाले के पास भेज देते हैं। दिवाली के मौके पर सैलरी, एडवांस, बोनस एवं अन्य प्रकार के खर्च देने होते हैं। जब बैंकिंग ही नहीं होगी, तो व्यापारी क्या करेगा।
ग्राहक को कोई परेशानी है, तो वह संपर्क करे
वी बैंकर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महामंत्री आशीष मिश्रा और शिखा सिंह चौहान ने बताया कि नए मॉड्यूल को लागू करने से पहले बैंक कर्मचारियों को इसकी समुचित ट्रेनिंग दी जानी चाहिए थी। नया सिस्टम कुछ दिनों तक ट्रायल के रूप में चलाया जाना चाहिए था। ऐसा करने से ग्राहकों और स्टॉफ दोनों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। दिवाली पर्व के दौरान क्लीयरिंग न होने से अरबों रुपये का लेनदेन प्रभावित हो गया है। लीड बैंक मैनेजर आदित्य चंद्रा ने कहा कि उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। किसी ग्राहक को कोई परेशानी है, तो वह संपर्क करे, समस्या का समाधान कराया जाएगा।
हर दिन अटके हजारों चेक
शहर में सरकारी और निजी बैंकों की करीब 500 से अधिक शाखाएं कार्यरत हैं। हर दिन हजारों चेक क्लियरिंग के लिए इन शाखाओं में पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा चेक व्यापारी वर्ग के होते हैं। सिस्टम फेल होने से न सिर्फ कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि ग्राहकों का बैंकिंग कामकाज भी ठप पड़ा है।
बड़े बैंकों में सबसे ज्यादा दिक्कत
एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंकों की शाखाएं और ग्राहक संख्या सबसे ज्यादा हैं। यही कारण है कि इन बैंकों में क्लियरिंग की समस्या भी गंभीर रूप से सामने आ रही है। इसके अलावा पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, केनरा बैंक, ग्रामीण बैंक और कई निजी बैंक भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। ज्यादातर शाखाओं में क्लियरिंग रिजेक्ट या प्रोसेसिंग में जैसे संदेश ही दिख रहे हैं। नतीजतन, ग्राहकों के चेक पिछले छह दिनों से लटके हुए हैं।