सभी को मुचलके पर छोड़ दिया गया
इनमें शहर के कई बैंकों में खोले गए म्यूल खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम मंगाने के लिए किया गया था। साइबर इन खातों में रकम मंगाने के लिए बोगस गेमिंग एप का प्रयोग करते थे। बदले में एप को भी कमीशन दिया जाता था। म्यूल खातों में रकम आते ही उसे या तो तत्काल निकाल लिया जाता था या फिर किसी दूसरे म्यूल खाते में भेज दिया जाता था। आईटी एक्ट में मामला दर्ज होने के कारण फिलहाल सभी को मुचलके पर छोड़ दिया गया है।
बैंक प्रबंधकों को भी जारी होगा नोटिस
म्यूल खाते शहर की लगभग सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में खोले गए हैं। पुलिस उपायुक्त का कहना है कि इन बैंक प्रबंधकों को भी नोटिस जारी किया जाएगा कि आखिर इतनी रकम का ट्रांजेक्शन खातों से होने के बाद भी अधिकारियों ने अलर्ट जारी करते हुए पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी।
ठगों तक पहुंचने का रास्ता तलाश रही पुलिस
पुलिस का कहना है कि साइबर ठग सीधे म्यूल खाते खुलवाने वालों के संपर्क में नहीं आते हैं। लिहाजा पकड़े गए इन खाताधारकों से पता किया जाएगा कि किसके कहने पर, किसे आधार और पेन कार्ड सौंपे। उन्हें पैसे देने वाला कौन है। इस तरह से असली साइबर ठगों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
ये हैं पकड़े गए 35 म्यूल खाताधारक
सरवन कुमार, सुशांत कुमार, ज्ञानेंद्र सिंह, देवेंद्र, मोहित कुशवाहा, रोहित गौतम, आदिल, अभिषेक, शमशाद, अंकित, नाजिम, देशराज, गौरव, शज्जाद, अभय गुप्ता, आसिम हिंदरी, मोहम्मद फैजल, मनीष पाल, अभिषेक यादव, शिवेंद्र कुमार, आशीष कुमार, अभिषेक शर्मा, विशाल कुशवाह, विष्णु द्विवेदी, अवधेश कुमार, सुदामा, प्रेम शंकर, पुष्पेंद्र कुमार, अनिरुद्व तिवारी, शिवपूजन, शिवराम, जितेंद्र, चांदबाबू, अमित और नितिन के नाम शामिल हैं।