कुल्हाड़ी के हमले से घायल मुकेश और पीड़ित के अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी
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कानपुर में हत्या के प्रयास की विवेचना में लापरवाही बरतने वाले विवेचक तत्कालीन कुरिया चौकी इंचार्ज प्रमोद पटेल के खिलाफ सीजेएम सूरज मिश्रा ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही विवेचना पर ध्यान न देने वाले सेन पश्चिम पारा थाना प्रभारी और संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त की भूमिका की जांच करने के आदेश भी दिए गए हैं। कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को भी भेजी जाएगी।
सेन पश्चिम पारा थाने के ग्राम खरगपुर निवासी रामसेवक ने पड़ोसी श्यामसिंह, उसके बेटों अमित, अंकित, कपिल, अनुज, पुन्नीलाल व जितेंद्र के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने व कुल्हाड़ी-फरसे से हमला कर हत्या की कोशिश करने के मामले में 22 नवंबर 2024 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कपिल, अनुज, श्याम सिंह, सतीश कुमार उर्फ अमित के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी, जबकि बाकी के नाम हटा दिए गए थे।
सेन पश्चिम पारा थाने में ही तैनात हैं प्रमोद पटेल
इस पर अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने अभियुक्तों को बचाने के लिए गलत विवेचना करने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए विवेचक प्रमोद पटेल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। इसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए एसआई प्रमोद पटेल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं। प्रमोद पटेल वर्तमान में सेन पश्चिम पारा थाने में ही तैनात हैं, इसलिए कोर्ट ने प्रमोद पटेल के मुकदमे की विवेचना किसी दूसरे क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराने के निर्देश पुलिस आयुक्त को दिए हैं।
इन मुद्दों पर फंसे विवेचक
- विवेचक ने घटना में कुल्हाड़ी का इस्तेमाल न होने की बात कही, जबकि अग्रिम विवेचना के दौरान पुलिस ने कुल्हाड़ी बरामद कर ली।
- वीडियो फुटेज के आधार पर विवेचक ने कहा था घटना के समय अभियुक्त कुल्हाड़ी के बजाय लाठी-डंडे हाथ में लिए दिखाई दे रहे हैं, जबकि घटना 22 नवंबर 2024 की थी और वीडियो फुटेज 23 नवंबर का था।
- वादी और घायलों ने कोर्ट में दिए शपथपत्रों में जो बयान दिए थे, विवेचक ने उनके विपरीत बयान केस डायरी में दर्ज कर दिए।
- चश्मदीद गवाह के बयान तो दर्ज किए लेकिन यह नहीं पूछा कि किस-किसने, किस-किस हथियार से हमला किया।
- मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टर ने यह साफ नहीं किया कि किस हथियार से हमला किया गया। लेकिन विवेचक ने अपना निष्कर्ष निकाल दिया कि हमला कुल्हाड़ी से नहीं लाठी-डंडे से किया।
- इतनी गंभीर घटना में दस दिन तक न तो किसी की गिरफ्तारी की, न किसी के बयान लिए, न घटनास्थल का मुआयना किया और न ही नक्शा बनाया।
अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के लिए विवेचकों की ओर से अक्सर विवेचना में लापरवाही बरती जाती है। पीड़ित न्यायालय का सहारा लेता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में अग्रिम विवेचना का आदेश करके और विवेचक के खिलाफ उच्चाधिकारियों को विभागीय कार्रवाई करने के आदेश तक ही मामला सिमट जाता है। शायद शहर में पहली बार विवेचना में कमी पर किसी विवेचक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश कोर्ट ने दिया है। -करीम अहमद सिद्दीकी, पीडि़त के अधिवक्ता
इन धाराओं में दर्ज होगी रिपोर्ट
- धारा 199 बी - जानबूझकर गलत तरीके से विवेचना करना। इसमें दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
- धारा 201 - लोकसेवक द्वारा किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार करना। इसमें तीन साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
- धारा 256 - लोकसेवक द्वारा अभियुक्त को सजा से बचाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार करना। इसमें तीन साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
ये है मामला
दो पड़ोसी परिवारों के बीच मामूली बात को लेकर 22 नवंबर 2024 की शाम हुए झगड़े में एक पक्ष के तीन लडक़े बुरी तरह जख्मी हो गए थे। आरोप है कि कुल्हाड़ी के हमले से एक बेटे का सिर फट गया था। फरसे के हमले से दूसरे बेटे का अंगूठा कट गया था और डंडे की मार से पिता का हाथ टूट गया था। घायलों का कई दिनों तक उर्सला में इलाज भी चला। पीडि़त लगातार पुलिस के आला अधिकारियों व न्यायालय में सही विवेचना न किए जाने के बावत प्रार्थना पत्र देता रहा। विवेचना के बारे में रिपोर्ट मांगने पर विवेचक ने मनमाने तरीके से कुछ लोगों के नाम हटाकर और कुछ के खिलाफ धाराएं बदलकर चार्जशीट कोर्ट भेज दी। कोर्ट ने अग्रिम विवेचना के आदेश दिए तब भी 15 दिन तक विवेचना ही शुरू नहीं की। इन सभी तथ्यों पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।