बारिश के बाद वायरल और बैक्टीरियल दोनों संक्रमण तेज हो गए हैं। दिमागी बुखार के 12 रोगी हैलट के मेडिसिन वार्ड में इलाज करा रहे हैं। इसके साथ ही बालरोग अस्पताल का आईसीयू दिमागी बुखार और निमोनिया के रोगियों से भर गया है। यहां के 20 वेंटिलेटर पर रोगी हैं। इसके साथ ही एनआईसीयू में दो बच्चों की मौत हो गई है।
दो रोगी एंबुलेंस से हैलट आए थे। लेकिन यहां पहुंचने के पहले ही उनकी मौत हो गई। ओपीडी में वायरल संक्रमण, डेंगू लाइक फीवर के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। इन रोगियों की रिपोर्ट डेंगू निगेटिव आ रही है लेकिन प्लेटलेट्स काउंट घटा हुआ है। इसके अलावा सांस की दिक्कत हो रही है।
संक्रामक रोगों ने एकदम से हमला कर दिया है। उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस) के चार-पांच रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। इसके अलावा 12 रोगियों का वार्डों में इलाज चल रहा है। संक्रमण के कारण रोगियों की मस्तिष्क की झिल्ली में सूजन आ गई है। इससे कुछ रोगियों को झटके आने के लक्षण भी हैं।
इसी तरह दिमागी बुखार और निमोनिया के रोगियों की संख्या बालरोग अस्पताल में बढ़ गई है। अस्पताल के सामान्य वार्ड, इमरजेंसी और आईसीयू के सभी बेड फुल हैं। एनआईसीयू में शनिवार सुबह दो बच्चों की मौत हो गई। दोपहर एंबुलेंस से हैलट आए जाजमऊ के नरेश (55) और किदवईनगर के किशोर (48) की मौत हो गई। हैलट पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉ. गिरि ने बताया कि समय रोगी अस्पताल आ जाता है तो इलाज से ठीक हो जाता है।